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		<title>कक्षा 12 - गणित</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: page updated&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;यहाँ कक्षा 12 वी से संबंधित गणित लेख हैं&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;wikitable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|'''S.No.'''&lt;br /&gt;
|'''Topic'''&lt;br /&gt;
|'''विषय'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|1&lt;br /&gt;
|[[Binary Operations]]&lt;br /&gt;
|[[द्वि-आधारी संक्रियाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|2&lt;br /&gt;
|[[Types of Functions]]&lt;br /&gt;
|[[फलनों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|3&lt;br /&gt;
|[[Types of Relations]]&lt;br /&gt;
|[[संबंधों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|4&lt;br /&gt;
|Types of Matrices&lt;br /&gt;
|[[आव्यूहों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|5&lt;br /&gt;
|Matrix&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6&lt;br /&gt;
|Operations on Matrices&lt;br /&gt;
|[[आव्यूहों पर संक्रियाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|7&lt;br /&gt;
|[[Composition of Functions and Invertible Function]]&lt;br /&gt;
|[[फलनों का संयोजन तथा व्युत्क्रमणीय फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8&lt;br /&gt;
|Transpose of a Matrix&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह का परिवर्त]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|9&lt;br /&gt;
|Invertible Matrices&lt;br /&gt;
|[[व्युत्क्रमणीय आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|10&lt;br /&gt;
|Determinant&lt;br /&gt;
|[[सारणिक]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|11&lt;br /&gt;
|Minors and Cofactors&lt;br /&gt;
|[[उपसारणिक और सहखंड]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|12&lt;br /&gt;
|Properties of Determinants&lt;br /&gt;
|[[सारणिकों के गुणधर्म]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|13&lt;br /&gt;
|Area of a Triangle - Determinants&lt;br /&gt;
|[[त्रिभुज का क्षेत्रफल - सारणिक]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|14&lt;br /&gt;
|Adjoint and Inverse of a Matrix&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह के सहखंडज और व्युत्क्रम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|15&lt;br /&gt;
|Relations&lt;br /&gt;
|[[संबंध]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|16&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आधारभूत संकल्पनाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|17&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के गुणधर्म]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|18&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[फलन का प्रतिलोम|फलन का प्रतिलो]]म&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|19&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सममित तथा विषम सममित आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|20&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह पर प्रारंभिक संक्रिया(आव्यूह रूपांतरण)]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह की कोटि|आव्यूह की कोट]]ि&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|22&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह का ऋण आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|23&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूहों का अंतर|आव्यूहों का अंत]]र&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|24&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सारणिकों और आव्यूहों के अनुप्रयोग|सारणिकों और आव्यूहों के अनुप्रयो]]ग&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|25&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सांतत्य]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अवकलनीयता]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|27&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[चरघातांकी तथा लघूगणकीय फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|28&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[लघूगणकीय अवकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|29&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[फलनों के प्राचलिक रूपों के अवकलज]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|30&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[द्वितीय कोटि का अवकलज]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|31&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[माध्यमान प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|32&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[रोले का प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|33&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[राशियों के परिवर्तन की दर]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|34&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[वर्धमान और ह्रासमान फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|35&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[स्पर्श रेखाएँ और अभिलंब]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|36&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सन्निकटन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|37&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[उच्चतम और निम्नतम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|38&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[समाकलन को अवकलन के व्युत्क्रम प्रक्रम के रूप में]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|39&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[समाकलन की विधियाँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|40&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[कुछ विशिष्ट फलनों के समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|41&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आंशिक भिन्नों द्वारा समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|42&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[खंडशः समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|43&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[निश्चित समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|44&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[कलन की आधारभूत प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|45&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[निश्चित समकलनों के कुछ गुणधर्म]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|46&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अनिश्चित समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|47&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[साधारण वक्रों के अंतर्गत क्षेत्रफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|48&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो वक्रों के मध्यवर्ती क्षेत्र का क्षेत्रफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|49&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अवकलन समीकरण का व्यापक एवं विशिष्ट हल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|50&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दिए हुए व्यापक हल वाले अवकल समीकरण का निर्माण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|51&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[प्रथम कोटि एवं प्रथम घात के अवकल समीकरणों को हल करने की विधियाँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|52&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अवकल समीकरण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|53&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिशों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|54&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिशों का योगफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|55&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[एक अदिश से सदिश का गुणन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|56&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो सदिशों का गुणनफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|57&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अदिश]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|58&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिश]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|59&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[स्थिति सदिश]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|60&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दिक्-कोसाइन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|61&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिश योग का त्रिभुज नियम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|62&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिश योग का समांतर चतुर्भुज नियम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|63&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[रेखा के दिक्-कोज्या व दिक्- अनुपात]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|64&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अंतरिक्ष में रेखा का समीकरण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|65&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो रेखाओं के मध्य का कोण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|66&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो रेखाओं के मध्य न्यूनतम दूरी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|67&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो रेखाओं का सह-तलीय होना]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|68&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो समतलो के बीच का कोण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|69&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[समतल से दीए गए बिन्दु की दूरी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|70&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[एक रेखा और एक समतल के बीच का कोण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|71&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[रैखिक प्रोग्रामन समस्या और उसका गणितीय सूत्रीकरण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|72&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं के भिन्न प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|73&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[उद्देशीय फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|74&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सप्रतिबंध प्रायिकता]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|75&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[प्रायिकता का गुणन नियम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|76&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[स्वतंत्र घटनाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|77&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[बेज-प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|78&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[यादृच्छिक चर और इसके प्रायिकता बंटन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|79&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[बरनौली परीक्षण और द्विपद बंटन]]&lt;br /&gt;
|}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
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		<title>Taxonomy for Mathematics Articles-12th Class</title>
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		<updated>2024-12-19T03:17:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: page updated&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| class=&amp;quot;wikitable&amp;quot;&lt;br /&gt;
!S.No&lt;br /&gt;
!Chapters&lt;br /&gt;
!Topics&lt;br /&gt;
!'''Article Creator Name'''&lt;br /&gt;
!'''अध्याय'''&lt;br /&gt;
!विषय&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|'''''PART-I'''''&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|1&lt;br /&gt;
|Relations and Functions&lt;br /&gt;
|[[Types of Relations]]&lt;br /&gt;
|English:Dr Vinamra &amp;amp;&lt;br /&gt;
Ramamurthy&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
Hindi:&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|संबंध और फलन&lt;br /&gt;
|[[संबंधों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[Types of Functions]]&lt;br /&gt;
|English:Dr Vinamra &amp;amp;&lt;br /&gt;
Ramamurthy&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
Hindi:&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[फलनों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[Composition of Functions and Invertible Function]]&lt;br /&gt;
|English:Dr Vinamra &amp;amp;&lt;br /&gt;
Ramamurthy&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
Hindi: Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[फलनों का संयोजन तथा व्युत्क्रमणीय फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[Binary Operations]]&lt;br /&gt;
|English:Dr Vinamra &amp;amp;&lt;br /&gt;
Ramamurthy&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
Hindi:&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
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|[[द्वि-आधारी संक्रियाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Relations&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[संबंध]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Functions&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|2&lt;br /&gt;
|Inverse Trignometric Functions&lt;br /&gt;
|Basic Concepts&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन&lt;br /&gt;
|[[आधारभूत संकल्पनाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Properties of Inverse Trigonometric Functions&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के गुणधर्म]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Inverse of a function&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[फलन का प्रतिलोम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|3&lt;br /&gt;
|Matrices&lt;br /&gt;
|Matrix&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|आव्यूह&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|Types of Matrices&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
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|[[आव्यूहों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|Operations on Matrices&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
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|[[आव्यूहों पर संक्रियाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|Transpose of a Matrix&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह का परिवर्त]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Symmetric and Skew Symmetric Matrices&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सममित तथा विषम सममित आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Elementary Operation(Transformation) of a Matrix&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह पर प्रारंभिक संक्रिया(आव्यूह रूपांतरण)]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Invertible Matrices&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[व्युत्क्रमणीय आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Order of a matrix&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह की कोटि]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Negative of a matrix&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह का ऋण आव्यूह]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Difference of  matrices&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूहों का अंतर]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|4&lt;br /&gt;
|Determinants&lt;br /&gt;
|Determinant&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|सारणिक&lt;br /&gt;
|[[सारणिक]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Properties of Determinants&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सारणिकों के गुणधर्म]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Area of a Triangle - Determinants&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
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|[[त्रिभुज का क्षेत्रफल - सारणिक]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Minors and Cofactors&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[उपसारणिक और सहखंड]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Adjoint and Inverse of a Matrix&lt;br /&gt;
|Ramamurthy&lt;br /&gt;
Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आव्यूह के सहखंडज और व्युत्क्रम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Application of Determinants and Matrices&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सारणिकों और आव्यूहों के अनुप्रयोग]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|5&lt;br /&gt;
|Continuity and Differentiablity&lt;br /&gt;
|Continuity&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|सांतत्य तथा अवकलनीयता&lt;br /&gt;
|[[सांतत्य]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Differentiability&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अवकलनीयता]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Exponential and Logarithmic Functions&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[चरघातांकी तथा लघूगणकीय फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Logarithmic Differentiation&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[लघूगणकीय अवकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Derivatives of Functions in Parametric Forms&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[फलनों के प्राचलिक रूपों के अवकलज]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Second Order Derivative&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[द्वितीय कोटि का अवकलज]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Mean Value Theorem&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[माध्यमान प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Rolle's theorem&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[रोले का प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6&lt;br /&gt;
|Application of Derivatives&lt;br /&gt;
|Rate of Change of Quantities&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|अवकलज के अनुप्रयोग&lt;br /&gt;
|[[राशियों के परिवर्तन की दर]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Increasing and Decreasing Functions&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[वर्धमान और ह्रासमान फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Tangents and Normals&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[स्पर्श रेखाएँ और अभिलंब]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Approximations&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सन्निकटन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Maxima and Minima&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[उच्चतम और निम्नतम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|'''''PART-II'''''&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8&lt;br /&gt;
|Integrals&lt;br /&gt;
|Integration as an Inverse Process of Differentiation&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|समाकलन&lt;br /&gt;
|[[समाकलन को अवकलन के व्युत्क्रम प्रक्रम के रूप में]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Methods of Integration&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[समाकलन की विधियाँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Integrals of Some Particular Functions&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[कुछ विशिष्ट फलनों के समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Integration by Partial Fractions&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[आंशिक भिन्नों द्वारा समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Integration by Parts&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[खंडशः समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Definite Integral&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[निश्चित समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Fundamental Theorem of Calculus&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[कलन की आधारभूत प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Some Properties Definite Integrals&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[निश्चित समकलनों के कुछ गुणधर्म]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Indefinite Integral&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अनिश्चित समाकलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|9&lt;br /&gt;
|Application of Integrals&lt;br /&gt;
|Area under Simple Curves&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|समकलनों के अनुप्रयोग&lt;br /&gt;
|[[साधारण वक्रों के अंतर्गत क्षेत्रफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Area between Two Curves&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो वक्रों के मध्यवर्ती क्षेत्र का क्षेत्रफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|10&lt;br /&gt;
|Differential Equations&lt;br /&gt;
|Basic Concepts&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|अवकल समीकरण&lt;br /&gt;
|[[आधारभूत संकल्पनाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|General and Particular Solution of a Differential Equations&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अवकलन समीकरण का व्यापक एवं विशिष्ट हल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Formation of a Differential Equation whose General Equation is given&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दिए हुए व्यापक हल वाले अवकल समीकरण का निर्माण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Methods of Solving First Order, First Degree Differential Equations&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[प्रथम कोटि एवं प्रथम घात के अवकल समीकरणों को हल करने की विधियाँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Differential Equation&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अवकल समीकरण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|11&lt;br /&gt;
|Vector Algebra&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|सदिश बीजगणित&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Types of Vectors&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिशों के प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Addition of Vectors&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिशों का योगफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Multiplication of Vector by a Scalar&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[एक अदिश से सदिश का गुणन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Product of Two Vectors&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो सदिशों का गुणनफल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Scalars&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अदिश]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Vectors&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिश]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Position vector&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[स्थिति सदिश]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Direction cosines&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दिक्-कोसाइन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Triangle law of vector addition&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिश योग का त्रिभुज नियम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Parallelogram law of vector addition&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[सदिश योग का समांतर चतुर्भुज नियम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|12&lt;br /&gt;
|Three Dimensional Geometry&lt;br /&gt;
|Direction Cosines and Direction Ratios of a Line&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|त्रि-विमीय ज्यामिति&lt;br /&gt;
|[[रेखा के दिक्-कोज्या व दिक्- अनुपात]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Equation of a Line in Space&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[अंतरिक्ष में रेखा का समीकरण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Angle between Two Lines&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो रेखाओं के मध्य का कोण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Shortest Distance between Two Lines&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो रेखाओं के मध्य न्यूनतम दूरी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Coplanarity of Two Lines&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो रेखाओं का सह-तलीय होना]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Angle between Two Planes&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[दो समतलो के बीच का कोण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Distance of a Point from a Plane&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[समतल से दीए गए बिन्दु की दूरी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Angle between a Line and a Plane&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[एक रेखा और एक समतल के बीच का कोण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|13&lt;br /&gt;
|Linear Programming&lt;br /&gt;
|Linear Programming problems and its Mathematical Formulation&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|रैखिक प्रोग्रामन&lt;br /&gt;
|[[रैखिक प्रोग्रामन समस्या और उसका गणितीय सूत्रीकरण]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Different Types of Linear Programming Problems&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं के भिन्न प्रकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Objective function&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[उद्देशीय फलन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|14&lt;br /&gt;
|Probability&lt;br /&gt;
|Conditional Probability&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|प्रायिकता&lt;br /&gt;
|[[सप्रतिबंध प्रायिकता]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Multiplication Theorem on Probability&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[प्रायिकता का गुणन नियम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Independent Events&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[स्वतंत्र घटनाएँ]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Bayes' Theorem&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[बेज-प्रमेय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Random Variables and its Probability Distribution&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[यादृच्छिक चर और इसके प्रायिकता बंटन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|Bernoulli Trials and Binomial Distribution&lt;br /&gt;
|Mani&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
|[[बरनौली परीक्षण और द्विपद बंटन]]&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
[[Category:Information]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=56253</id>
		<title>सदिश</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=56253"/>
		<updated>2024-12-19T03:14:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: image added&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;सदिश, ज्यामितीय इकाइयाँ हैं जिनमें परिमाण और दिशा होती है। सदिश को एक [[रेखा]] द्वारा दर्शाया जा सकता है जिसमें एक बाण चिन्ह उसकी दिशा की ओर संकेत करता है और इसकी लंबाई सदिश के परिमाण को दर्शाती है। इसलिए, सदिश को बाण चिन्ह  द्वारा दर्शाया जाता है, उनके पास प्रारंभिक बिंदु और अन्त्य बिंदु होते हैं। सदिश की अवधारणा 200 वर्षों की अवधि में विकसित हुई थी। सदिश का उपयोग विस्थापन, वेग, त्वरण आदि जैसी भौतिक राशियों को दर्शाने के लिए किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके अतिरिक्त, सदिश का उपयोग 19वीं शताब्दी के अंत में विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के क्षेत्र के आगमन के साथ प्रारंभ  हुआ। यहाँ, हम सदिश की परिभाषा के साथ-साथ सदिश के गुणों, सदिश के सूत्रों, सदिश के संचालन के साथ-साथ बेहतर समझने का प्रयास करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदिश एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है वाहक। सदिश एक बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; को बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;B&amp;lt;/math&amp;gt; तक ले जाते हैं। दो बिंदुओं &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; और &amp;lt;math&amp;gt;B&amp;lt;/math&amp;gt; के बीच की रेखा की लंबाई को सदिश का परिमाण कहा जाता है और बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; से बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;B&amp;lt;/math&amp;gt; तक विस्थापन की दिशा को सदिश &amp;lt;math&amp;gt;AB&amp;lt;/math&amp;gt; की दिशा कहा जाता है। सदिश को यूक्लिडियन सदिश या स्थानिक सदिश भी कहा जाता है। सदिश के गणित, भौतिकी, इंजीनियरिंग और कई अन्य क्षेत्रों में कई अनुप्रयोग हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यूक्लिडियन ज्यामिति में सदिश- परिभाषा ==&lt;br /&gt;
गणित में सदिश एक ज्यामितीय इकाई है जिसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। सदिशों में उस बिंदु पर एक प्रारंभिक बिंदु होता है जहाँ से वे प्रारंभ  होते हैं और एक अन्त्य बिंदु होता है जो बिंदु की अंतिम स्थिति बताता है। सदिशों पर विभिन्न संक्रियाएँ लागू की जा सकती हैं जैसे जोड़, घटाव और गुणा। हम इस लेख में सदिशों पर संक्रियाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदिश - उदाहरण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भौतिकी में सदिश एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, वेग, विस्थापन, त्वरण, बल सभी सदिश राशियाँ हैं जिनमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।&lt;br /&gt;
[[File:सदिश.jpg|thumb|सदिश]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों का निरूपण ==&lt;br /&gt;
सदिशों को साधारणतः बोल्ड लोअरकेस में दर्शाया जाता है जैसे कि &amp;lt;math&amp;gt;a &amp;lt;/math&amp;gt; या अक्षर के ऊपर बाण चिन्ह का उपयोग करके &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{a }&amp;lt;/math&amp;gt;. सदिशों को उनके आरंभिक और अंतिम बिंदुओं द्वारा उनके ऊपर बाण चिन्ह से भी दर्शाया जा सकता है, उदाहरण के लिए, सदिश &amp;lt;math&amp;gt;AB&amp;lt;/math&amp;gt; को &amp;lt;sub&amp;gt;&amp;lt;math&amp;gt;{\overrightarrow{AB}}&amp;lt;/math&amp;gt;&amp;lt;/sub&amp;gt; के रूप में दर्शाया जा सकता है. सदिश के निरूपण का मानक रूप &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{A}=a\overset{\frown}{i}+b\overset{\frown}{j}+c\overset{\frown}{k}&amp;lt;/math&amp;gt;है. यहाँ, &amp;lt;math&amp;gt;a,b,c&amp;lt;/math&amp;gt;  [[वास्तविक संख्याएँ]] हैं और &amp;lt;math&amp;gt;\overset{\frown}{i},\overset{\frown}{j},\overset{\frown}{k}&amp;lt;/math&amp;gt; क्रमशः &amp;lt;math&amp;gt;x&amp;lt;/math&amp;gt;-अक्ष, &amp;lt;math&amp;gt;y&amp;lt;/math&amp;gt;-अक्ष और &amp;lt;math&amp;gt;z&amp;lt;/math&amp;gt;-अक्ष के साथ इकाई सदिश हैं.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदिश के आरंभिक बिंदु को पूंछ भी कहा जाता है जबकि अंतिम बिंदु को सिर कहा जाता है। सदिश किसी वस्तु की एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति का वर्णन करते हैं। [[कार्टेशियन पद्धति|कार्टेशियन]] निर्देशांक प्रणाली में, सदिश को क्रमित युग्मों द्वारा दर्शाया जा सकता है। इसी तरह, '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' आयामों में सदिश को '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' टपल द्वारा दर्शाया जा सकता है। सदिश को घटकों के टपल से भी पहचाना जाता है जो आधार सदिश के एक समुच्चय के लिए [[अदिश]] गुणांक होते हैं। आधार सदिश को इस प्रकार दर्शाया जाता है: &amp;lt;math&amp;gt;e_1 = (1,0,0), e_2 = (0,1,0), e_3 = (0,0,1)&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिश का सूत्र ==&lt;br /&gt;
किसी सदिश के परिमाण की गणना उसके घटकों के वर्गों के योग का वर्गमूल लेकर की जा सकती है। यदि &amp;lt;math&amp;gt;(x,y,z)&amp;lt;/math&amp;gt;सदिश &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; के घटक हैं, तो &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; का परिमाण सूत्र इस प्रकार दिया जाता है,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;math&amp;gt;|A| = \sqrt{ (x^2+y^2+z^2)}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी भी प्रकार का अभिलेख का क्रम एक आदिश मन होता है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;(a_1\overset{\frown}{i} + b_1\overset{\frown}{j} + c_1 \overset{\frown}{k}) + (a_2 \overset{\frown}{i} + b_2\overset{\frown}{j} + c_2 \overset{\frown}{k}) = (a_1 + a_2)\overset{\frown}{i} + (b_1 + b_2)\overset{\frown}{j} + (c_1 + c_2) \overset{\frown}{k}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;(a_1\overset{\frown}{i} + b_1\overset{\frown}{j} + c_1 \overset{\frown}{k}) - (a_2 \overset{\frown}{i} + b_2\overset{\frown}{j} + c_2 \overset{\frown}{k}) = (a_1 - a_2)\overset{\frown}{i} + (b_1 - b_2)\overset{\frown}{j} + (c_1 - c_2) \overset{\frown}{k}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;(a_1\overset{\frown}{i} + b_1\overset{\frown}{j} + c_1 \overset{\frown}{k}) \cdot (a_2 \overset{\frown}{i} + b_2\overset{\frown}{j} + c_2 \overset{\frown}{k}) = (a_1 \cdot a_2) + (b_1 \cdot b_2) + (c_1 \cdot c_2)&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{A}\times \overrightarrow{B} = \overset{\frown}{i} (a_2b_3 - a_3b_2) - \overset{\frown}{j} (a_1b_3 - a_3b_1) + \overset{\frown}{k}(a_1b_2 - a_2b_1)&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\theta = cos^{-1}(a\cdot b/|a||b|)&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों के गुणधर्म ==&lt;br /&gt;
सदिशों के निम्नलिखित गुण सदिशों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं और सदिशों से संबंधित कई अंकगणितीय संक्रियाएँ करने में उपयोगी होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सदिशों का योग क्रमविनिमेय और साहचर्य होता है।&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{A}\cdot \overrightarrow{B}=\overrightarrow{B}\cdot \overrightarrow{A}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{A}\times \overrightarrow{B}\neq \overrightarrow{B}\times \overrightarrow{A}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overset{\frown}{i}\cdot \overset{\frown}{i} = \overset{\frown}{j}\cdot \overset{\frown}{j} = \overset{\frown}{k}\cdot \overset{\frown}{k}= 1&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overset{\frown}{i}\cdot \overset{\frown}{j} = \overset{\frown}{j}\cdot \overset{\frown}{k} = \overset{\frown}{k}\cdot \overset{\frown}{i}= 0&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overset{\frown}{i}\times \overset{\frown}{i} = \overset{\frown}{j}\times \overset{\frown}{j} = \overset{\frown}{k}\times \overset{\frown}{k}= 0&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{i}\times \overrightarrow{j}=\overrightarrow{k};\overrightarrow{j}\times \overrightarrow{k}=\overrightarrow{i};\overrightarrow{k}\times \overrightarrow{i}=\overrightarrow{j}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{j}\times \overrightarrow{i}=\overrightarrow{-k};\overrightarrow{k}\times \overrightarrow{j}=\overrightarrow{-i};\overrightarrow{i}\times \overrightarrow{k}=\overrightarrow{-j}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* दो सदिशों का डॉट गुणनफल  एक अदिश राशि है और दो सदिशों के तल में स्थित होता है।&lt;br /&gt;
* दो सदिशों का वज्र गुणनफल एक सदिश है, जो इन दो सदिशों वाले तल के लंबवत होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों के अनुप्रयोग ==&lt;br /&gt;
भौतिकी और गणित के क्षेत्र में सदिश बहुत उपयोगी होते हैं। इनका उपयोग वस्तुओं और भौतिक राशियों की स्थिति, विस्थापन, वेग और त्वरण को दर्शाने के लिए किया जाता है। सदिशों के कुछ अनुप्रयोग हैं,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आंशिक अंतर समीकरणों और अंतर ज्यामिति के अध्ययन में सदिश बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।&lt;br /&gt;
* भौतिकी और इंजीनियरिंग में सदिशों का उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र और द्रव प्रवाह के उपयोग सहित क्षेत्रों में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ ==&lt;br /&gt;
सदिशों की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ सहायक हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ऑर्थोगोनल सदिशों का डॉट गुणनफल  सदैव शून्य होता है।&lt;br /&gt;
* समानांतर सदिशों का वज्र गुणनफल  सदैव शून्य होता है।&lt;br /&gt;
* दो या अधिक सदिश संरेखीय होते हैं यदि उनका वज्र गुणनफल शून्य हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:गणित]][[Category:कक्षा-12]]&lt;br /&gt;
[[Category:सदिश बीजगणित]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=File:%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6.jpg&amp;diff=56252</id>
		<title>File:सदिश.jpg</title>
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		<updated>2024-12-19T03:05:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;सदिश&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=56251</id>
		<title>सदिश</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=56251"/>
		<updated>2024-12-19T02:44:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: formulas&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;सदिश, ज्यामितीय इकाइयाँ हैं जिनमें परिमाण और दिशा होती है। सदिश को एक [[रेखा]] द्वारा दर्शाया जा सकता है जिसमें एक बाण चिन्ह उसकी दिशा की ओर संकेत करता है और इसकी लंबाई सदिश के परिमाण को दर्शाती है। इसलिए, सदिश को बाण चिन्ह  द्वारा दर्शाया जाता है, उनके पास प्रारंभिक बिंदु और अन्त्य बिंदु होते हैं। सदिश की अवधारणा 200 वर्षों की अवधि में विकसित हुई थी। सदिश का उपयोग विस्थापन, वेग, त्वरण आदि जैसी भौतिक राशियों को दर्शाने के लिए किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके अतिरिक्त, सदिश का उपयोग 19वीं शताब्दी के अंत में विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के क्षेत्र के आगमन के साथ प्रारंभ  हुआ। यहाँ, हम सदिश की परिभाषा के साथ-साथ सदिश के गुणों, सदिश के सूत्रों, सदिश के संचालन के साथ-साथ बेहतर समझने का प्रयास करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदिश एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है वाहक। सदिश एक बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; को बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;B&amp;lt;/math&amp;gt; तक ले जाते हैं। दो बिंदुओं &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; और &amp;lt;math&amp;gt;B&amp;lt;/math&amp;gt; के बीच की रेखा की लंबाई को सदिश का परिमाण कहा जाता है और बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; से बिंदु &amp;lt;math&amp;gt;B&amp;lt;/math&amp;gt; तक विस्थापन की दिशा को सदिश &amp;lt;math&amp;gt;AB&amp;lt;/math&amp;gt; की दिशा कहा जाता है। सदिश को यूक्लिडियन सदिश या स्थानिक सदिश भी कहा जाता है। सदिश के गणित, भौतिकी, इंजीनियरिंग और कई अन्य क्षेत्रों में कई अनुप्रयोग हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यूक्लिडियन ज्यामिति में सदिश- परिभाषा ==&lt;br /&gt;
गणित में सदिश एक ज्यामितीय इकाई है जिसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। सदिशों में उस बिंदु पर एक प्रारंभिक बिंदु होता है जहाँ से वे प्रारंभ  होते हैं और एक अन्त्य बिंदु होता है जो बिंदु की अंतिम स्थिति बताता है। सदिशों पर विभिन्न संक्रियाएँ लागू की जा सकती हैं जैसे जोड़, घटाव और गुणा। हम इस लेख में सदिशों पर संक्रियाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदिश - उदाहरण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भौतिकी में सदिश एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, वेग, विस्थापन, त्वरण, बल सभी सदिश राशियाँ हैं जिनमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों का निरूपण ==&lt;br /&gt;
सदिशों को साधारणतः बोल्ड लोअरकेस में दर्शाया जाता है जैसे कि &amp;lt;math&amp;gt;a &amp;lt;/math&amp;gt; या अक्षर के ऊपर बाण चिन्ह का उपयोग करके &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{a }&amp;lt;/math&amp;gt;. सदिशों को उनके आरंभिक और अंतिम बिंदुओं द्वारा उनके ऊपर बाण चिन्ह से भी दर्शाया जा सकता है, उदाहरण के लिए, सदिश &amp;lt;math&amp;gt;AB&amp;lt;/math&amp;gt; को &amp;lt;sub&amp;gt;&amp;lt;math&amp;gt;{\overrightarrow{AB}}&amp;lt;/math&amp;gt;&amp;lt;/sub&amp;gt; के रूप में दर्शाया जा सकता है. सदिश के निरूपण का मानक रूप &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{A}=a\overset{\frown}{i}+b\overset{\frown}{j}+c\overset{\frown}{k}&amp;lt;/math&amp;gt;है. यहाँ, &amp;lt;math&amp;gt;a,b,c&amp;lt;/math&amp;gt;  [[वास्तविक संख्याएँ]] हैं और &amp;lt;math&amp;gt;\overset{\frown}{i},\overset{\frown}{j},\overset{\frown}{k}&amp;lt;/math&amp;gt; क्रमशः &amp;lt;math&amp;gt;x&amp;lt;/math&amp;gt;-अक्ष, &amp;lt;math&amp;gt;y&amp;lt;/math&amp;gt;-अक्ष और &amp;lt;math&amp;gt;z&amp;lt;/math&amp;gt;-अक्ष के साथ इकाई सदिश हैं.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदिश के आरंभिक बिंदु को पूंछ भी कहा जाता है जबकि अंतिम बिंदु को सिर कहा जाता है। सदिश किसी वस्तु की एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति का वर्णन करते हैं। [[कार्टेशियन पद्धति|कार्टेशियन]] निर्देशांक प्रणाली में, सदिश को क्रमित युग्मों द्वारा दर्शाया जा सकता है। इसी तरह, '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' आयामों में सदिश को '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' टपल द्वारा दर्शाया जा सकता है। सदिश को घटकों के टपल से भी पहचाना जाता है जो आधार सदिश के एक समुच्चय के लिए [[अदिश]] गुणांक होते हैं। आधार सदिश को इस प्रकार दर्शाया जाता है: &amp;lt;math&amp;gt;e_1 = (1,0,0), e_2 = (0,1,0), e_3 = (0,0,1)&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिश का परिमाण ==&lt;br /&gt;
किसी सदिश के परिमाण की गणना उसके घटकों के वर्गों के योग का वर्गमूल लेकर की जा सकती है। यदि &amp;lt;math&amp;gt;(x,y,z)&amp;lt;/math&amp;gt;सदिश &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; के घटक हैं, तो &amp;lt;math&amp;gt;A&amp;lt;/math&amp;gt; का परिमाण सूत्र इस प्रकार दिया जाता है,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|A| = √ (x2+y2+z2)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== किसी सदिश का परिमाण एक अदिश मान होता है। ===&lt;br /&gt;
इंडेक्सिक पॉइंट को टेल पर भी कहा जाता है जबकि अंतिम पॉइंट को सिर पर लगाया जाता है। किसी वस्तु की एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति का वर्णन करें। कार्टियो निर्देशांक प्रणाली में, सीरियल को क्रमबद्ध युग्मों द्वारा जारी किया जा सकता है। इसी तरह, 'एन' आयामों में वर्गीकरण को 'एन' टपल द्वारा सूचीबद्ध किया जा सकता है। आदिवासियों को आदिवासियों के टपल से भी पीटा जाता है जो आधार के आधार पर आदिवासियों के एक समुच्चय के लिए आदिवासी गुण होते हैं। आधार को इस प्रकार संग्रहित किया जाता है: e1 = (1,0,0), e2 = (0,1,0), e3 = (0,0,1)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== विवरण का क्रम ===&lt;br /&gt;
किसी भी प्रकार के सूचकांक के योग का वर्गमूल लेकर जाना संभव है। यदि (x,y,z) A के घटक हैं, तो A का परिमाण सूत्र इस प्रकार दिया जाता है,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|A| = √ (x2+y2+z2)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी भी प्रकार का अभिलेख का क्रम एक आदिश मन होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* (a1^i + b1 ^j + c1 ^k) + (a2 ^i + b2 ^j + c2 ^k) = (a1 + a2) ^i + (b1 + b2) ^j + (c1 + c2) ^k&lt;br /&gt;
* (a1^i + b1 ^j + c1 ^k) - (a2 ^i + b2 ^j + c2 ^k) = (a1 - a2) ^i + (b1 - b2) ^j + (c1 - c2) ^k&lt;br /&gt;
* (a1^i + b1 ^j + c1 ^k) '''.''' (a2 ^i + b2 ^j + c2 ^k) = (a1·a2) + (b1·b2) + (c1·c2)&lt;br /&gt;
* →A×→B = ^i (a2b3 - a3b2) - ^j (a1b3 - a3b1) + ^k (a1b2 - a2b1)&lt;br /&gt;
* θ = cos&amp;lt;sup&amp;gt;-1&amp;lt;/sup&amp;gt; (a·b/|a||b|)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों के गुणधर्म ==&lt;br /&gt;
सदिशों के निम्नलिखित गुण सदिशों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं और सदिशों से संबंधित कई अंकगणितीय संक्रियाएँ करने में उपयोगी होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* The addition of vectors is commutative and associative.&lt;br /&gt;
* →A.→B=→B.→A&lt;br /&gt;
* →A×→B≠→B×→A&lt;br /&gt;
* ^i.^i=^j.^j=^k.^k=1&lt;br /&gt;
* ^i.^j=^j.^k=^k.^i=0&lt;br /&gt;
* ^i×^i=^j×^j=^k×^k=0&lt;br /&gt;
* ^i×^j=^k ; ^j×^k=^i ; ^k×^i=^j&lt;br /&gt;
* ^j×^i=−^k ; ^k×^j=−^i ; ^i×^k=−^j&lt;br /&gt;
* दो सदिशों का डॉट उत्पाद एक अदिश राशि है और दो सदिशों के तल में स्थित होता है।&lt;br /&gt;
* दो सदिशों का क्रॉस उत्पाद एक सदिश है, जो इन दो सदिशों वाले तल के लंबवत होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों के अनुप्रयोग ==&lt;br /&gt;
भौतिकी और गणित के क्षेत्र में सदिश बहुत उपयोगी होते हैं। इनका उपयोग वस्तुओं और भौतिक राशियों की स्थिति, विस्थापन, वेग और त्वरण को दर्शाने के लिए किया जाता है। सदिशों के कुछ अनुप्रयोग हैं,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आंशिक अंतर समीकरणों और अंतर ज्यामिति के अध्ययन में सदिश बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।&lt;br /&gt;
* भौतिकी और इंजीनियरिंग में सदिशों का उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र और द्रव प्रवाह के उपयोग सहित क्षेत्रों में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ ==&lt;br /&gt;
सदिशों की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु सहायक हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ऑर्थोगोनल सदिशों का डॉट उत्पाद हमेशा शून्य होता है।&lt;br /&gt;
* समानांतर सदिशों का क्रॉस उत्पाद हमेशा शून्य होता है।&lt;br /&gt;
* दो या अधिक सदिश संरेखीय होते हैं यदि उनका क्रॉस उत्पाद शून्य हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:गणित]][[Category:कक्षा-12]]&lt;br /&gt;
[[Category:सदिश बीजगणित]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=56250</id>
		<title>सदिश</title>
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		<updated>2024-12-19T02:24:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: added content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;वेक्टर ज्यामितीय इकाइयाँ हैं जिनमें परिमाण और दिशा होती है। एक वेक्टर को एक रेखा द्वारा दर्शाया जा सकता है जिसमें एक तीर उसकी दिशा की ओर इशारा करता है और इसकी लंबाई वेक्टर के परिमाण को दर्शाती है। इसलिए, वेक्टर को तीरों द्वारा दर्शाया जाता है, उनके पास प्रारंभिक बिंदु और टर्मिनल बिंदु होते हैं। वेक्टर की अवधारणा 200 वर्षों की अवधि में विकसित हुई थी। वेक्टर का उपयोग विस्थापन, वेग, त्वरण आदि जैसी भौतिक राशियों को दर्शाने के लिए किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके अलावा, वेक्टर का उपयोग 19वीं शताब्दी के अंत में विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के क्षेत्र के आगमन के साथ शुरू हुआ। यहाँ, हम वेक्टर की परिभाषा के साथ-साथ वेक्टर के गुणों, वेक्टर के सूत्रों, वेक्टर के संचालन के साथ-साथ बेहतर समझ के लिए हल किए गए उदाहरणों का अध्ययन करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वेक्टर एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है वाहक। वेक्टर एक बिंदु A को बिंदु B तक ले जाते हैं। दो बिंदुओं A और B के बीच की रेखा की लंबाई को वेक्टर का परिमाण कहा जाता है और बिंदु A से बिंदु B तक विस्थापन की दिशा को वेक्टर AB की दिशा कहा जाता है। वेक्टर को यूक्लिडियन वेक्टर या स्थानिक वेक्टर भी कहा जाता है। वेक्टर के गणित, भौतिकी, इंजीनियरिंग और कई अन्य क्षेत्रों में कई अनुप्रयोग हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यूक्लिडियन ज्यामिति में सदिश- परिभाषा ==&lt;br /&gt;
गणित में सदिश एक ज्यामितीय इकाई है जिसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। सदिशों में उस बिंदु पर एक प्रारंभिक बिंदु होता है जहाँ से वे शुरू होते हैं और एक टर्मिनल बिंदु होता है जो बिंदु की अंतिम स्थिति बताता है। सदिशों पर विभिन्न संक्रियाएँ लागू की जा सकती हैं जैसे जोड़, घटाव और गुणा। हम इस लेख में सदिशों पर संक्रियाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदिश - उदाहरण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भौतिकी में सदिश एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, वेग, विस्थापन, त्वरण, बल सभी सदिश राशियाँ हैं जिनमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों का निरूपण ==&lt;br /&gt;
सदिशों को आम तौर पर बोल्ड लोअरकेस में दर्शाया जाता है जैसे कि a या अक्षर के ऊपर तीर का उपयोग करके →a. सदिशों को उनके आरंभिक और अंतिम बिंदुओं द्वारा उनके ऊपर तीर से भी दर्शाया जा सकता है, उदाहरण के लिए, सदिश AB को −−→AB के रूप में दर्शाया जा सकता है. सदिश के निरूपण का मानक रूप →A=a^i+b^j+c^k है. यहाँ, a,b,c वास्तविक संख्याएँ हैं और ^i,^j,^k क्रमशः x-अक्ष, y-अक्ष और z-अक्ष के साथ इकाई सदिश हैं.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वेक्टर के आरंभिक बिंदु को पूंछ भी कहा जाता है जबकि अंतिम बिंदु को सिर कहा जाता है। वेक्टर किसी वस्तु की एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति का वर्णन करते हैं। कार्तीय निर्देशांक प्रणाली में, वेक्टर को क्रमित युग्मों द्वारा दर्शाया जा सकता है। इसी तरह, 'n' आयामों में वेक्टर को 'n' टपल द्वारा दर्शाया जा सकता है। वेक्टर को घटकों के टपल से भी पहचाना जाता है जो आधार वेक्टर के एक सेट के लिए अदिश गुणांक होते हैं। आधार वेक्टर को इस प्रकार दर्शाया जाता है: e1 = (1,0,0), e2 = (0,1,0), e3 = (0,0,1)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== वेक्टर का परिमाण ==&lt;br /&gt;
किसी वेक्टर के परिमाण की गणना उसके घटकों के वर्गों के योग का वर्गमूल लेकर की जा सकती है। यदि (x,y,z) वेक्टर A के घटक हैं, तो A का परिमाण सूत्र इस प्रकार दिया जाता है,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|A| = √ (x2+y2+z2)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी वेक्टर का परिमाण एक अदिश मान होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इंडेक्सिक पॉइंट को टेल पर भी कहा जाता है जबकि अंतिम पॉइंट को सिर पर लगाया जाता है। किसी वस्तु की एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति का वर्णन करें। कार्टियो निर्देशांक प्रणाली में, सीरियल को क्रमबद्ध युग्मों द्वारा जारी किया जा सकता है। इसी तरह, 'एन' आयामों में वर्गीकरण को 'एन' टपल द्वारा सूचीबद्ध किया जा सकता है। आदिवासियों को आदिवासियों के टपल से भी पीटा जाता है जो आधार के आधार पर आदिवासियों के एक सेट के लिए आदिवासी गुण होते हैं। आधार को इस प्रकार संग्रहित किया जाता है: e1 = (1,0,0), e2 = (0,1,0), e3 = (0,0,1)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विवरण का क्रम&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी भी प्रकार के सूचकांक के योग का वर्गमूल लेकर जाना संभव है। यदि (x,y,z) A के घटक हैं, तो A का परिमाण सूत्र इस प्रकार दिया जाता है,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|ए| = √ (x2+y2+z2)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी भी प्रकार का अभिलेख का क्रम एक आदिश मन होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* (a1^i + b1 ^j + c1 ^k) + (a2 ^i + b2 ^j + c2 ^k) = (a1 + a2) ^i + (b1 + b2) ^j + (c1 + c2) ^k&lt;br /&gt;
* (a1^i + b1 ^j + c1 ^k) - (a2 ^i + b2 ^j + c2 ^k) = (a1 - a2) ^i + (b1 - b2) ^j + (c1 - c2) ^k&lt;br /&gt;
* (a1^i + b1 ^j + c1 ^k) '''.''' (a2 ^i + b2 ^j + c2 ^k) = (a1·a2) + (b1·b2) + (c1·c2)&lt;br /&gt;
* →A×→B = ^i (a2b3 - a3b2) - ^j (a1b3 - a3b1) + ^k (a1b2 - a2b1)&lt;br /&gt;
* θ = cos&amp;lt;sup&amp;gt;-1&amp;lt;/sup&amp;gt; (a·b/|a||b|)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों के गुणधर्म ==&lt;br /&gt;
सदिशों के निम्नलिखित गुण सदिशों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं और सदिशों से संबंधित कई अंकगणितीय संक्रियाएँ करने में उपयोगी होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* The addition of vectors is commutative and associative.&lt;br /&gt;
* →A.→B=→B.→A&lt;br /&gt;
* →A×→B≠→B×→A&lt;br /&gt;
* ^i.^i=^j.^j=^k.^k=1&lt;br /&gt;
* ^i.^j=^j.^k=^k.^i=0&lt;br /&gt;
* ^i×^i=^j×^j=^k×^k=0&lt;br /&gt;
* ^i×^j=^k ; ^j×^k=^i ; ^k×^i=^j&lt;br /&gt;
* ^j×^i=−^k ; ^k×^j=−^i ; ^i×^k=−^j&lt;br /&gt;
* दो सदिशों का डॉट उत्पाद एक अदिश राशि है और दो सदिशों के तल में स्थित होता है।&lt;br /&gt;
* दो सदिशों का क्रॉस उत्पाद एक सदिश है, जो इन दो सदिशों वाले तल के लंबवत होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सदिशों के अनुप्रयोग ==&lt;br /&gt;
भौतिकी और गणित के क्षेत्र में सदिश बहुत उपयोगी होते हैं। इनका उपयोग वस्तुओं और भौतिक राशियों की स्थिति, विस्थापन, वेग और त्वरण को दर्शाने के लिए किया जाता है। सदिशों के कुछ अनुप्रयोग हैं,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आंशिक अंतर समीकरणों और अंतर ज्यामिति के अध्ययन में सदिश बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।&lt;br /&gt;
* भौतिकी और इंजीनियरिंग में सदिशों का उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र और द्रव प्रवाह के उपयोग सहित क्षेत्रों में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ ==&lt;br /&gt;
सदिशों की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु सहायक हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ऑर्थोगोनल सदिशों का डॉट उत्पाद हमेशा शून्य होता है।&lt;br /&gt;
* समानांतर सदिशों का क्रॉस उत्पाद हमेशा शून्य होता है।&lt;br /&gt;
* दो या अधिक सदिश संरेखीय होते हैं यदि उनका क्रॉस उत्पाद शून्य हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:गणित]][[Category:कक्षा-12]]&lt;br /&gt;
[[Category:सदिश बीजगणित]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=56249</id>
		<title>अदिश</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6&amp;diff=56249"/>
		<updated>2024-12-19T02:15:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: added content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;सदिश बीजगणित में, अदिश वह राशि होती है जिसमें मात्र परिमाण या आकार होता है, जबकि [[सदिश]] में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अदिश राशि वह राशि होती है जिसमें केवल परिमाण होता है और कोई दिशा नहीं होती। अदिश राशियाँ एक-आयामी होती हैं और इन्हें एक ही संख्या द्वारा दर्शाया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा ==&lt;br /&gt;
अदिश, एक भौतिक राशि जो पूरी तरह से अपने परिमाण द्वारा वर्णित होती है। अदिश के उदाहरण हैं आयतन, घनत्व, गति, ऊर्जा, द्रव्यमान और समय। अन्य राशियाँ, जैसे बल और वेग, में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं और उन्हें सदिश कहा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अदिश को [[वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ|वास्तविक संख्याओं]] द्वारा वर्णित किया जाता है जो साधारणतः  लेकिन अनिवार्य नहीं कि सकारात्मक हों। उदाहरण के लिए, किसी कण पर बल द्वारा किया गया कार्य एक ऋणात्मक संख्या होती है जब कण उस दिशा के विपरीत गति करता है जिसमें बल कार्य करता है, जैसे कि जब घर्षण बल किसी गतिमान पिंड को धीमा कर देता है। बीजगणित के सामान्य नियमों द्वारा अदिशों में विनिमय किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दो अदिशों का परिणाम सदैव अदिश होता है, लेकिन दो सदिशों का परिणाम या तो अदिश हो सकता है या सदिश।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;अदिश(स्केलर)&amp;quot; शब्द का आविष्कार 19वीं सदी में आयरिश गणितज्ञ विलियम रोवन हैमिल्टन ने किया था। &amp;quot;सदिश(वेक्टर)&amp;quot; शब्द लैटिन से आया है और इसका अर्थ है &amp;quot;वाहक&amp;quot;।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[रैखिक समीकरण|रैखिक बीजगणित]] में, अदिश वास्तविक संख्याएं या किसी क्षेत्र के तत्व होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी सदिश के अदिश गुणन को सदिश को खींचने या सिकोड़ने, या यदि अदिश ऋणात्मक है तो उसे विपरीत दिशा में पलटने के रूप में समझा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अदिश में लंबाई, द्रव्यमान, आवेश, आयतन और समय उपस्थित हैं। सदिश में बल और वेग उपस्थित हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अदिश राशि की परिभाषा ==&lt;br /&gt;
हम अदिश राशि को ऐसी भौतिक राशि के रूप में परिभाषित करते हैं जिसमें परिमाण होता है और कोई दिशा नहीं होती। इसके अतिरिक्त , हम भौतिक राशियों को केवल उनके संख्यात्मक मान से, उनकी संबंधित इकाइयों के साथ, दिशाओं के बिना वर्णित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके अतिरिक्त , इन भौतिक राशियों का योग बीजगणित के सरल नियमों का पालन करता है। तो, आप देखते हैं कि हम केवल उनके परिमाण जोड़ते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अदिश राशियों के उदाहरण ==&lt;br /&gt;
अदिश राशियों के बहुत सारे उदाहरण हैं, कुछ सबसे आम उदाहरणों में उपस्थित हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* द्रव्यमान&lt;br /&gt;
* गति&lt;br /&gt;
* दूरी&lt;br /&gt;
* समय&lt;br /&gt;
* क्षेत्र&lt;br /&gt;
* आयतन&lt;br /&gt;
* घनत्व&lt;br /&gt;
* तापमान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अदिश गुणन ==&lt;br /&gt;
अदिश गुणनफल [[एक अदिश से सदिश का गुणन|सदिशों पर गुणन]] संक्रिया है। दो सदिशों का अदिश गुणनफल सदिशों के संगत घटकों के गुणनफल का योग होता है। दूसरे शब्दों में, अदिश गुणनफल दो सदिशों के परिमाणों के गुणनफल और उनके बीच के कोण के कोज्या(कोसाइन) के समान होता है। यह एक अदिश राशि है और इसे सदिशों का [[दो सदिशों का गुणनफल|डॉट गुणनफल]] भी कहा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अदिश गुणनफल दो या अधिक सदिशों के संगत घटकों का गुणनफल है। जैसा कि नाम से पता चलता है, अदिश गुणनफल एक अदिश राशि देता है, अर्थात परिणाम के रूप में एक वास्तविक संख्या। अदिश गुणनफल की गणना सदिशों के परिमाण और उनके बीच के कोण की कोज्या के गुणनफल को लेकर भी की जा सकती है। अब, आइए दो और तीन सदिशों के लिए अदिश गुणन सूत्र देखें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अदिश गुणनफल के लिए बीजगणितीय सूत्र ==&lt;br /&gt;
अब, जब हमने दो सदिशों के लिए उनके परिमाणों के संदर्भ में अदिश गुणनफल सूत्र को ज्ञात कर लिया है, तो आइए दो सदिशों के अदिश गुणनफल के लिए बीजगणितीय सूत्र देखें। यदि&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{a}=[a_1,a_2,a_3,...,a_n]&amp;lt;/math&amp;gt; और &amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{b}=[b_1,b_2,b_3,...,b_n],\  n&amp;lt;/math&amp;gt; घटकों वाले दो सदिश हैं, तो सदिश &amp;lt;math&amp;gt;a&amp;lt;/math&amp;gt; और &amp;lt;math&amp;gt;b&amp;lt;/math&amp;gt; का अदिश गुणनफल इस प्रकार दिया जाता है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;math&amp;gt;\overrightarrow{a}\cdot \overrightarrow{b}=\textstyle \sum_{i=1}^n \displaystyle  a_ib_i=a_1b_1+a_2b_2+a_3b_3+...+a_nb_n&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अदिश गुणनफल के अनुप्रयोग ==&lt;br /&gt;
अदिश गुणनफल के सदिश सिद्धांत में कई अनुप्रयोग हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सदिश का प्रक्षेपण''': अदिश गुणनफल का उपयोग किसी सदिश के दूसरे सदिश पर प्रक्षेपण को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। सदिश &amp;lt;math&amp;gt;a&amp;lt;/math&amp;gt; का सदिश &amp;lt;math&amp;gt;b&amp;lt;/math&amp;gt; पर प्रक्षेपण &amp;lt;math&amp;gt;a.b/|b|&amp;lt;/math&amp;gt; द्वारा दिया जाता है। इसी प्रकार, सदिश &amp;lt;math&amp;gt;b&amp;lt;/math&amp;gt; का सदिश &amp;lt;math&amp;gt;a&amp;lt;/math&amp;gt; पर प्रक्षेपण &amp;lt;math&amp;gt;a.b/|a|&amp;lt;/math&amp;gt; द्वारा दिया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अदिश त्रिगुण गुणनफल''' : अदिश गुणनफल का उपयोग तीन सदिशों के अदिश त्रिगुण गुणनफल की गणना में किया जाता है। अदिश त्रिगुण गुणनफल का सूत्र है &amp;lt;math&amp;gt;a\cdot (b \times c) = b\cdot (c \times a) = c\cdot (a \times b)&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''दो सदिशों के बीच का कोण:''' अदिश गुणनफल का उपयोग सूत्र &amp;lt;math&amp;gt;cos \theta = (a.b)/(|a| |b|)&amp;lt;/math&amp;gt; का उपयोग करके दो सदिशों के बीच के कोण को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== अदिश गुणनफल पर युक्तियाँ और उपाय ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overset{\frown}{i}\cdot \overset{\frown}{i} = \overset{\frown}{j}\cdot \overset{\frown}{j} = \overset{\frown}{k}\cdot \overset{\frown}{k}= 1&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* &amp;lt;math&amp;gt;\overset{\frown}{i}\cdot \overset{\frown}{j} = \overset{\frown}{j}\cdot \overset{\frown}{k} = \overset{\frown}{k}\cdot \overset{\frown}{i}= 0&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
* यदि &amp;lt;math&amp;gt;\theta = 0&amp;lt;/math&amp;gt; तो &amp;lt;math&amp;gt;a.b = ab&amp;lt;/math&amp;gt;  [दो सदिश एक ही दिशा में समान्तर हैं &amp;lt;math&amp;gt;\Rightarrow \theta = 0&amp;lt;/math&amp;gt;]।&lt;br /&gt;
* यदि &amp;lt;math&amp;gt;\theta = \pi, a.b = -ab&amp;lt;/math&amp;gt;  [दो सदिश विपरीत दिशा में समान्तर हैं &amp;lt;math&amp;gt;\Rightarrow \theta = \pi&amp;lt;/math&amp;gt;]&lt;br /&gt;
* यदि &amp;lt;math&amp;gt;\theta = \pi/2,&amp;lt;/math&amp;gt; तो &amp;lt;math&amp;gt;a.b = 0&amp;lt;/math&amp;gt; [दो सदिश हैं&amp;lt;math&amp;gt;\Rightarrow \theta = \pi/2&amp;lt;/math&amp;gt;], अर्थात वे लम्बकोणीय हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:गणित]][[Category:कक्षा-12]]&lt;br /&gt;
[[Category:सदिश बीजगणित]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%83%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%9A%E0%A4%B0_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%A8&amp;diff=56248</id>
		<title>यादृच्छिक चर और इसके प्रायिकता बंटन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%83%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%9A%E0%A4%B0_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%A8&amp;diff=56248"/>
		<updated>2024-12-18T15:05:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: added internal links&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;यादृच्छिक चर, एक चर है जिसका उपयोग यादृच्छिक प्रयोग के परिणाम को मापने के लिए किया जाता है। चूंकि आँकड़ा दो प्रकार का हो सकता है, असतत और सतत इसलिए, दो प्रकार के यादृच्छिक चर हो सकते हैं। एक असतत यादृच्छिक चर एक सटीक मान ले सकता है जबकि एक सतत यादृच्छिक चर का मान कुछ विशेष अंतराल के बीच होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[प्रायिकता का सांख्यिकीय दृष्टिकोण|प्रायिकता प्रसरण]] का उपयोग यह दिखाने के लिए किया जाता है कि किसी दिए गए यादृच्छिक चर के मानों पर संभावनाएँ कैसे वितरित की जाती हैं। इस लेख में, हम एक यादृच्छिक चर की परिभाषा, इसके प्रकार और विभिन्न उदाहरण देखेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यादृच्छिक चर,  वह चर होता है जो कई मान ले सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यादृच्छिक घटना के कई परिणाम हो सकते हैं। इस प्रकार, यादृच्छिक चर को बीजीय चर के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। बीजीय चर एक बीजीय समीकरण में एक अज्ञात मात्रा के मान का प्रतिनिधित्व करता है जिसे गणना की जा सकती है। दूसरी ओर, एक यादृच्छिक चर में मानों का एक समुच्चय हो सकता है जो एक यादृच्छिक प्रयोग का परिणामी परिणाम हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा ==&lt;br /&gt;
एक यादृच्छिक चर को एक प्रकार के चर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसका मूल्य एक निश्चित यादृच्छिक घटना के संख्यात्मक परिणामों पर निर्भर करता है। इसे स्टोकेस्टिक चर के रूप में भी जाना जाता है। यादृच्छिक चर सदैव [[वास्तविक संख्याएँ]] होती हैं क्योंकि उन्हें मापने योग्य होना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उदाहरण ==&lt;br /&gt;
मान लीजिए 2 पासे फेंके जाते हैं और यादृच्छिक चर, &amp;lt;math&amp;gt;X&amp;lt;/math&amp;gt;, का उपयोग संख्याओं के योग को दर्शाने के लिए किया जाता है। तब, &amp;lt;math&amp;gt;X&amp;lt;/math&amp;gt; का सबसे छोटा मान 2 (1 + 1) के बराबर होगा, जबकि उच्चतम मान &amp;lt;math&amp;gt;12 (6 + 6)&amp;lt;/math&amp;gt; होगा। इस प्रकार, &amp;lt;math&amp;gt;X&amp;lt;/math&amp;gt;,  2 से 12 (समावेशी) के बीच कोई भी मान ले सकता है। अब यदि प्रत्येक परिणाम से संभावनाएँ जुड़ी हुई हैं तो X का प्रायिकता प्रसरण निर्धारित किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यादृच्छिक चर के प्रकार ==&lt;br /&gt;
उपलब्ध आँकड़ा के प्रकार के आधार पर यादृच्छिक चर को दो व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। ये इस प्रकार दिए गए हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* असतत यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* [[सतत बारंबारता बंटन|सतत]] यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक असतत यादृच्छिक चर का वर्णन करने के लिए एक प्रायिकता द्रव्यमान फलन का उपयोग किया जाता है और एक प्रायिकता घनत्व फलन एक सतत यादृच्छिक चर का वर्णन करता है। आगामी अनुभाग इन विषयों को विस्तार से कवर करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== असतत यादृच्छिक चर ===&lt;br /&gt;
असतत यादृच्छिक चर वह चर है जो सीमित संख्या में अलग-अलग मान ले सकता है। उदाहरण के लिए, एक परिवार में बच्चों की संख्या को असतत यादृच्छिक चर का उपयोग करके दर्शाया जा सकता है। एक प्रायिकता प्रसरण का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि एक यादृच्छिक चर क्या मान ले सकता है और यह इन मानों को कितनी बार लेता है। कुछ असतत यादृच्छिक चर जो कुछ विशेष प्रायिकता वितरणों से जुड़े हैं, उन्हें आगामी अनुभाग में विस्तृत रूप से बताया जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* द्विपद यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* ज्यामितीय यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* [[बरनौली परीक्षण और द्विपद बंटन|बर्नौली यादृच्छिक चर]]&lt;br /&gt;
* पॉइसन यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सतत यादृच्छिक चर ==&lt;br /&gt;
एक यादृच्छिक चर जो अनंत संभावित मान ले सकता है उसे सतत यादृच्छिक चर के रूप में जाना जाता है। इस तरह के चर को किसी विशिष्ट मान के बजाय मानों के अंतराल पर परिभाषित किया जाता है। सतत यादृच्छिक चर का एक उदाहरण किसी व्यक्ति का वजन है। एक सतत यादृच्छिक चर के सटीक मान लेने की संभावना 0 है, इसलिए ऐसे चर का वर्णन करने के लिए एक प्रायिकता घनत्व फलन का उपयोग किया जाता है। कुछ सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले सतत यादृच्छिक चर नीचे दिए गए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* घातांकीय यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* सामान्य यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यादृच्छिक चर का माध्य ==&lt;br /&gt;
यादृच्छिक चर के औसत मान को यादृच्छिक चर का माध्य कहा जाता है। माध्य को अपेक्षित मान के रूप में भी जाना जाता है। इसे आम तौर पर E[X] द्वारा दर्शाया जाता है। जहाँ X यादृच्छिक चर है। यादृच्छिक चर के माध्य या अपेक्षित मान को चर के सभी मानों के भारित औसत के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है। यादृच्छिक चर के माध्य के लिए सूत्र नीचे दिए गए हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असतत यादृच्छिक चर का माध्य: &amp;lt;math&amp;gt;E[X] =\textstyle \sum_{}^ \displaystyle x P(X=x)&amp;lt;/math&amp;gt;  यहाँ  &amp;lt;math&amp;gt;P(X = x)&amp;lt;/math&amp;gt; प्रायिकता द्रव्यमान फलन है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतत यादृच्छिक चर का माध्य: &amp;lt;math&amp;gt;E[X] =\int xf(x)dx. f(x)&amp;lt;/math&amp;gt; प्रायिकता घनत्व फलन है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यादृच्छिक चर का प्रसरण ==&lt;br /&gt;
यादृच्छिक चर के प्रसरण को माध्य से यादृच्छिक चर के अंतर के वर्ग के अपेक्षित मान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यादृच्छिक चर का प्रसरण &amp;lt;math&amp;gt;Var[X]&amp;lt;/math&amp;gt; या &amp;lt;math&amp;gt;\sigma^2&amp;lt;/math&amp;gt; द्वारा दिया जाता है। यदि &amp;lt;math&amp;gt;\mu&amp;lt;/math&amp;gt; माध्य है तो प्रसरण का सूत्र इस प्रकार दिया जाता है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असतत यादृच्छिक चर का विचरण: &amp;lt;math&amp;gt;Var[X] =\textstyle \sum_{}^ \displaystyle(x-\mu)^2P(X=x)&amp;lt;/math&amp;gt; सतत यादृच्छिक चर का विचरण: &amp;lt;math&amp;gt;Var[X] = \int (x-\mu)^2f(x)dx&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:प्रायिकता]][[Category:गणित]][[Category:कक्षा-12]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%83%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%9A%E0%A4%B0_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%A8&amp;diff=56247</id>
		<title>यादृच्छिक चर और इसके प्रायिकता बंटन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%83%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%9A%E0%A4%B0_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%A8&amp;diff=56247"/>
		<updated>2024-12-18T14:45:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: added content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;यादृच्छिक चर एक चर है जिसका उपयोग यादृच्छिक प्रयोग के परिणाम को मापने के लिए किया जाता है। चूंकि डेटा दो प्रकार का हो सकता है, असतत और सतत इसलिए, दो प्रकार के यादृच्छिक चर हो सकते हैं। एक असतत यादृच्छिक चर एक सटीक मान ले सकता है जबकि एक सतत यादृच्छिक चर का मान कुछ विशेष अंतराल के बीच होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संभाव्यता वितरण का उपयोग यह दिखाने के लिए किया जाता है कि किसी दिए गए यादृच्छिक चर के मानों पर संभावनाएँ कैसे वितरित की जाती हैं। इस लेख में, हम एक यादृच्छिक चर की परिभाषा, इसके प्रकार और विभिन्न उदाहरण देखेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यादृच्छिक चर वह वैरिएबल होता है जो कई मान ले सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रैंडम घटना के कई परिणाम हो सकते हैं। इस प्रकार, यादृच्छिक चर को बीजीय वैरिएबल के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। बीजीय वैरिएबल एक बीजीय समीकरण में एक अज्ञात मात्रा के मान का प्रतिनिधित्व करता है जिसे गणना की जा सकती है। दूसरी ओर, एक यादृच्छिक चर में मानों का एक सेट हो सकता है जो एक रैंडम प्रयोग का परिणामी परिणाम हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा ==&lt;br /&gt;
एक यादृच्छिक चर को एक प्रकार के चर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसका मूल्य एक निश्चित यादृच्छिक घटना के संख्यात्मक परिणामों पर निर्भर करता है। इसे स्टोकेस्टिक चर के रूप में भी जाना जाता है। यादृच्छिक चर हमेशा वास्तविक संख्याएँ होती हैं क्योंकि उन्हें मापने योग्य होना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उदाहरण ==&lt;br /&gt;
मान लीजिए 2 पासे फेंके जाते हैं और यादृच्छिक चर, X, का उपयोग संख्याओं के योग को दर्शाने के लिए किया जाता है। तब, X का सबसे छोटा मान 2 (1 + 1) के बराबर होगा, जबकि उच्चतम मान 12 (6 + 6) होगा। इस प्रकार, X 2 से 12 (समावेशी) के बीच कोई भी मान ले सकता है। अब यदि प्रत्येक परिणाम से संभावनाएँ जुड़ी हुई हैं तो X का संभाव्यता वितरण निर्धारित किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यादृच्छिक चर के प्रकार ==&lt;br /&gt;
उपलब्ध डेटा के प्रकार के आधार पर यादृच्छिक चर को दो व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। ये इस प्रकार दिए गए हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* असतत यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* सतत यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक असतत यादृच्छिक चर का वर्णन करने के लिए एक संभाव्यता द्रव्यमान फ़ंक्शन का उपयोग किया जाता है और एक संभाव्यता घनत्व फ़ंक्शन एक सतत यादृच्छिक चर का वर्णन करता है। आगामी अनुभाग इन विषयों को विस्तार से कवर करेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== असतत यादृच्छिक चर ===&lt;br /&gt;
असतत यादृच्छिक चर वह चर है जो सीमित संख्या में अलग-अलग मान ले सकता है। उदाहरण के लिए, एक परिवार में बच्चों की संख्या को असतत यादृच्छिक चर का उपयोग करके दर्शाया जा सकता है। एक संभाव्यता वितरण का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि एक यादृच्छिक चर क्या मान ले सकता है और यह इन मानों को कितनी बार लेता है। कुछ असतत यादृच्छिक चर जो कुछ विशेष संभाव्यता वितरणों से जुड़े हैं, उन्हें आगामी अनुभाग में विस्तृत रूप से बताया जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* द्विपद यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* ज्यामितीय यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* बर्नौली यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* पॉइसन यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सतत यादृच्छिक चर ==&lt;br /&gt;
एक यादृच्छिक चर जो अनंत संभावित मान ले सकता है उसे सतत यादृच्छिक चर के रूप में जाना जाता है। इस तरह के चर को किसी विशिष्ट मान के बजाय मानों के अंतराल पर परिभाषित किया जाता है। सतत यादृच्छिक चर का एक उदाहरण किसी व्यक्ति का वजन है। एक सतत यादृच्छिक चर के सटीक मान लेने की संभावना 0 है, इसलिए ऐसे चर का वर्णन करने के लिए एक संभाव्यता घनत्व फ़ंक्शन का उपयोग किया जाता है। कुछ सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले सतत यादृच्छिक चर नीचे दिए गए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* घातांकीय यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
* सामान्य यादृच्छिक चर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यादृच्छिक चर का माध्य ==&lt;br /&gt;
यादृच्छिक चर के औसत मान को यादृच्छिक चर का माध्य कहा जाता है। माध्य को अपेक्षित मान के रूप में भी जाना जाता है। इसे आम तौर पर E[X] द्वारा दर्शाया जाता है। जहाँ X यादृच्छिक चर है। यादृच्छिक चर के माध्य या अपेक्षित मान को चर के सभी मानों के भारित औसत के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है। यादृच्छिक चर के माध्य के लिए सूत्र नीचे दिए गए हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असतत यादृच्छिक चर का माध्य: E[X] =∑xP(X=x).  यहाँ P(X = x) प्रायिकता द्रव्यमान फ़ंक्शन है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सतत यादृच्छिक चर का माध्य: E[X] =∫xf(x)dx. f(x) प्रायिकता घनत्व फ़ंक्शन है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== यादृच्छिक चर का प्रसरण ==&lt;br /&gt;
यादृच्छिक चर के प्रसरण को माध्य से यादृच्छिक चर के अंतर के वर्ग के अपेक्षित मान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यादृच्छिक चर का प्रसरण Var[X] या σ2 द्वारा दिया जाता है। यदि μ माध्य है तो प्रसरण का सूत्र इस प्रकार दिया जाता है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असतत यादृच्छिक चर का विचरण: Var[X] =∑(x−μ)2P(X=x)सतत यादृच्छिक चर का विचरण: Var[X] = ∫(x−μ)2f(x)dx&lt;br /&gt;
[[Category:प्रायिकता]][[Category:गणित]][[Category:कक्षा-12]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>बरनौली परीक्षण और द्विपद बंटन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%A6_%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%A8&amp;diff=56246"/>
		<updated>2024-12-18T14:27:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: added internal links&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;बर्नौली परीक्षण, एक असतत प्रायिकता परीक्षण  है जो ऐसे प्रयोगों का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ केवल दो संभावित परिणाम होते हैं: सफलता &amp;lt;math&amp;gt;(1)&amp;lt;/math&amp;gt; एक प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt; के साथ, या विफलता &amp;lt;math&amp;gt;(0)&amp;lt;/math&amp;gt; एक प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;1-p&amp;lt;/math&amp;gt; के साथ। प्रत्येक प्रयोग, जिसे बर्नौली परीक्षण के रूप में जाना जाता है, एक यादृच्छिक घटना है जिसके दो परस्पर अनन्य परिणाम होते हैं, जैसे &amp;quot;हाँ या नहीं,&amp;quot; &amp;quot;सफलता या विफलता,&amp;quot; या &amp;quot;सत्य या असत्य।&amp;quot; उदाहरण के लिए, किसी परीक्षा में उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण होने को बर्नौली परीक्षण  का उपयोग करके प्रतिरूप किया जा सकता है। सफलता की प्रायिकता परीक्षणों में स्थिर रहती है, और प्रत्येक परीक्षण अन्य से स्वतंत्र होता है। ऐसे परीक्षणों के [[अनुक्रम]] को **बर्नौली प्रक्रिया** कहा जाता है। इस अवधारणा का नाम स्विस गणितज्ञ जैकब बर्नौली के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने प्रायिकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बर्नौली परीक्षण और द्विपद बंटन के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध उपस्थित है। जब द्विपद बंटन में केवल एक परीक्षण होता है &amp;lt;math&amp;gt;(n=1)&amp;lt;/math&amp;gt;, तो यह बर्नौली परीक्षण  में सरल हो जाता है। जबकि बर्नौली परीक्षण  एकल परीक्षण को प्रतिरूप करता है, द्विपद बंटन &amp;lt;math&amp;gt;n&amp;lt;/math&amp;gt; स्वतंत्र बर्नौली परीक्षणों में सफलताओं की एक विशिष्ट संख्या की प्रायिकता को प्रतिरूप करता है। अपनी सरलता के कारण, बर्नौली परीक्षण अधिक जटिल प्रायिकता परीक्षण  के लिए आधार के रूप में कार्य करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा-बरनौली परीक्षण ==&lt;br /&gt;
[[प्रायिकता की अभिगृहतीय दृष्टिकोण|प्रायिकता]] में बर्नौली परीक्षण बिल्कुल दो परिणामों वाले [[यादृच्छिक चर और इसके प्रायिकता बंटन|यादृच्छिक]] प्रयोग हैं। बर्नौली परीक्षण का एक वास्तविक जीवन उदाहरण यह है कि आज बरसात होगी या नहीं। अब, केवल संभावित परिणाम हाँ और नहीं हैं और एक दूसरे से स्वतंत्र हैं। साधारणतः, बर्नौली परीक्षण के परिणाम सफलता और विफलता होते हैं। सफलता की प्रायिकता को '&amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt;' से दर्शाया जाता है जबकि विफलता की प्रायिकता को &amp;lt;math&amp;gt;1-p=q &amp;lt;/math&amp;gt; से दर्शाया जाता है। बेटर्नौली परीक्षणों के कुछ अन्य उदाहरण हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* यदि नवजात शिशु लड़की है या लड़का?&lt;br /&gt;
* अच्छी तरह से फेंटे गए डेक का दसवां पत्ता इक्का है। संभावित परिणाम हाँ और नहीं हैं।&lt;br /&gt;
* सिक्का उछालने की घटना। केवल दो संभावित परिणाम चित और पट  हैं।&lt;br /&gt;
* एक पासा फेंकना जहाँ '1' एक 'सफलता' है, अन्य सभी संख्याओं को 'विफलता' माना जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बर्नौली परीक्षण की शर्तें ==&lt;br /&gt;
अब जब हम बर्नौली परीक्षण का मतलब जानते हैं, तो आइए इसके लिए आवश्यक शर्तों को समझें। नीचे बर्नौली परीक्षण के लिए शर्तों की सूची दी गई है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* परीक्षण की संख्या सीमित होनी चाहिए।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण स्वतंत्र होना चाहिए।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण के मात्र दो संभावित परिणाम होने चाहिए - सफलता और विफलता।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण में प्रत्येक परिणाम की प्रायिकता समान होनी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ-बर्नौली परीक्षण ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* बर्नौली परीक्षणों के मात्र  दो संभावित परिणाम होते हैं।&lt;br /&gt;
* दो संभावित परिणाम एक दूसरे से स्वतंत्र होते हैं।&lt;br /&gt;
* सफलता की प्रायिकता मात्र  &amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt; है और विफलता की प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;1-p=q &amp;lt;/math&amp;gt; है।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक बर्नौली परीक्षण में प्रत्येक परिणाम की प्रायिकता समान रहती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा-द्विपद बंटन ==&lt;br /&gt;
द्विपद बंटन,  द्विपद यादृच्छिक चर का प्रायिकता बंटन  है। एक यादृच्छिक चर एक वास्तविक-मूल्यवान फलन है जिसका प्रांत एक यादृच्छिक प्रयोग का नमूना स्थान है। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए आइए एक उदाहरण पर विचार करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक निष्पक्ष सिक्के को दो बार उछालें। यह एक द्विपद प्रयोग है। इस प्रयोग के 4 संभावित परिणाम  &amp;lt;math&amp;gt;{HH, HT, TH, TT}&amp;lt;/math&amp;gt;  हैं। एक चित प्राप्त करना सफलता के रूप में मानें। प्रत्येक संभावित परिणाम में सफलताओं की संख्या गिनें। यहाँ &amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt; (चित प्राप्त करना) एक द्विपद प्रयोग के &amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt; दोहराए गए परीक्षणों में सफलता है। &amp;lt;math&amp;gt;n (X) = 0, 1,&amp;lt;/math&amp;gt;या &amp;lt;math&amp;gt;2 &amp;lt;/math&amp;gt; द्विपद यादृच्छिक चर है। प्रायिकता का बंटन  एक द्विपद यादृच्छिक चर का है, और इसे द्विपद बंटन  के रूप में जाना जाता है।&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;wikitable&amp;quot;&lt;br /&gt;
!चित की संख्या (n(X))&lt;br /&gt;
!चित आने की संभावना (P(X))&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&amp;lt;math&amp;gt;0&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
|&amp;lt;math&amp;gt;P(x = 0) = 1/4 = 0.25&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&amp;lt;math&amp;gt;1&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
|&amp;lt;math&amp;gt;P(x = 1) = P(HT) = 1/4 + 1/4 = 0.50&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&amp;lt;math&amp;gt;2&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
|&amp;lt;math&amp;gt;P(x = 2) = P(HH) = 1/4 = 0.25&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह तालिका दर्शाती है कि एक बार उछालने पर एक चित आना 0.50 है। अब यदि एक सिक्के को 3 बार उछाला जाता है, तो मान लीजिए कि हमें दो चित आने का द्विपद बंटन  ज्ञात करना है। 3 सिक्के उछालने पर 8 परिणाम  &amp;lt;math&amp;gt;{HHH, HHT, HTH, HTT, THH, THT, TTH, TTT}&amp;lt;/math&amp;gt; मिलते हैं।।दो चित आने की प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;[P(HH)] 3/8&amp;lt;/math&amp;gt; है। इसी तरह, हम एक चित, 2 चित, 3 चित और 0 चित आने की प्रायिकता की गणना कर सकते हैं। द्विपद प्रायिकता बंटन  एक यादृच्छिक चर के रूप में इस प्रकार दिया गया है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;math&amp;gt;P(X = 0) = 1/8&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;math&amp;gt;P(X = 1) = 3/8&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;math&amp;gt;P(X = 2) = 3/8&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;math&amp;gt;P(X = 3)= 1/8&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सांख्यिकी में द्विपद बंटन ==&lt;br /&gt;
द्विपद बंटन , सांख्यिकीय महत्व के प्रसिद्ध द्विपद परीक्षण का आधार बनता है। द्विपद बंटन  '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' परीक्षणों में किसी प्रयोग की '&amp;lt;math&amp;gt;x &amp;lt;/math&amp;gt;' सफलताओं की प्रायिकता को दर्शाता है, जिसमें प्रयोग में प्रत्येक परीक्षण के लिए सफलता की प्रायिकता '&amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt;' दी गई है। द्विपद बंटन में यहाँ दो पैरामीटर &amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt; और &amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt; का उपयोग किया जाता है। चर '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' परीक्षणों की संख्या को दर्शाता है और चर '&amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt;' किसी एक (प्रत्येक) परिणाम की प्रायिकता को बताता है। एक परीक्षण जिसमें सफलता/विफलता जैसे एकल परिणाम होते हैं, उसे बर्नौली परीक्षण या बर्नौली प्रयोग भी कहा जाता है, और परिणामों की एक श्रृंखला को बर्नौली प्रक्रिया कहा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रयोग पर विचार करें जहाँ प्रत्येक बार &amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt; प्रयोगों की एक श्रृंखला के साथ हाँ/नहीं के लिए एक प्रश्न पूछा जाता है। फिर द्विपद प्रायिकता बंटन  में, बूलियन-मूल्यवान परिणाम सफलता/हाँ/सत्य/एक को प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt; के साथ और विफलता/नहीं/असत्य/शून्य को प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;q (q = 1 - p)&amp;lt;/math&amp;gt; के साथ दर्शाया जाता है। किसी एकल प्रयोग में जब &amp;lt;math&amp;gt;n = 1&amp;lt;/math&amp;gt; हो, तो द्विपद बंटन  को बर्नौली बंटन  कहा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि किसी पासे को यादृच्छिक रूप से 10 बार फेंका जाता है, तो किसी भी फेंके जाने पर 3 आने की प्रायिकता 1/6 है। इसी तरह, यदि हम पासे को 10 बार फेंकते हैं, तो हमारे पास &amp;lt;math&amp;gt;n = 10&amp;lt;/math&amp;gt; और &amp;lt;math&amp;gt;p = 1/6, q = 5/6&amp;lt;/math&amp;gt; है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== द्विपद बंटन सूत्र ==&lt;br /&gt;
द्विपद वितरण सूत्र किसी भी यादृच्छिक चर &amp;lt;math&amp;gt;X&amp;lt;/math&amp;gt; के लिए है, जो निम्न प्रकार दिया गया है;&amp;lt;math&amp;gt;P(x:n,p) = ^nC_x p^x (1-p)^{n-x}\ &amp;lt;/math&amp;gt;  या  &amp;lt;math&amp;gt;P(x:n,p) = ^nC_x p^x (q)^{n-x}\ &amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ &amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt; सफलता की संभावना है, &amp;lt;math&amp;gt;q&amp;lt;/math&amp;gt; विफलता की संभावना है, और &amp;lt;math&amp;gt;n =&amp;lt;/math&amp;gt; परीक्षणों की संख्या है। द्विपद वितरण सूत्र को n-बर्नौली परीक्षणों के रूप में भी लिखा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ  &amp;lt;math&amp;gt;^nC_x = n!/x!(n-x)!&amp;lt;/math&amp;gt;अत:,  &amp;lt;math&amp;gt;P(x:n,p) = n!/[x!(n-x)!].p^x.(q)^{n-x}&amp;lt;/math&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गुणधर्म -द्विपद बंटन ==&lt;br /&gt;
द्विपद बंटन  के गुणधर्म  हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* केवल दो अलग-अलग संभावित परिणाम हैं: सत्य/असत्य, सफलता/असफलता, हाँ/नहीं।&lt;br /&gt;
* किसी दिए गए प्रयोग में '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' बार दोहराए गए परीक्षणों की एक निश्चित संख्या होती है।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक प्रयास/परीक्षण के लिए सफलता या असफलता की प्रायिकता स्थिर रहती है।&lt;br /&gt;
* केवल सफल प्रयासों की गणना '&amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt;' स्वतंत्र परीक्षणों में से की जाती है।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण अपने आप में एक स्वतंत्र परीक्षण है, इसका मतलब है कि एक परीक्षण के परिणाम का दूसरे परीक्षण के परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ-द्विपद बंटन ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* द्विपद बंटन  का उपयोग करने के लिए, किसी प्रयोग में अवलोकनों या परीक्षणों की संख्या निश्चित या परिमित होती है।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक अवलोकन/प्रयास/परीक्षण अपने आप में स्वतंत्र होता है। इसका मतलब है कि किसी भी परीक्षण का अगले परीक्षण की प्रायिकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण के घटित होने की समान प्रायिकता होती है। एक परीक्षण से दूसरे परीक्षण में सफलता की प्रायिकता बिल्कुल समान होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:प्रायिकता]][[Category:गणित]][[Category:कक्षा-12]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Mani</name></author>
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		<title>बरनौली परीक्षण और द्विपद बंटन</title>
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		<updated>2024-12-18T14:24:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Mani: formulas&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;बर्नौली परीक्षण, एक असतत प्रायिकता परीक्षण  है जो ऐसे प्रयोगों का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ केवल दो संभावित परिणाम होते हैं: सफलता &amp;lt;math&amp;gt;(1)&amp;lt;/math&amp;gt; एक प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt; के साथ, या विफलता &amp;lt;math&amp;gt;(0)&amp;lt;/math&amp;gt; एक प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;1-p&amp;lt;/math&amp;gt; के साथ। प्रत्येक प्रयोग, जिसे बर्नौली परीक्षण के रूप में जाना जाता है, एक यादृच्छिक घटना है जिसके दो परस्पर अनन्य परिणाम होते हैं, जैसे &amp;quot;हाँ या नहीं,&amp;quot; &amp;quot;सफलता या विफलता,&amp;quot; या &amp;quot;सत्य या असत्य।&amp;quot; उदाहरण के लिए, किसी परीक्षा में उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण होने को बर्नौली परीक्षण  का उपयोग करके प्रतिरूप किया जा सकता है। सफलता की प्रायिकता परीक्षणों में स्थिर रहती है, और प्रत्येक परीक्षण अन्य से स्वतंत्र होता है। ऐसे परीक्षणों के अनुक्रम को **बर्नौली प्रक्रिया** कहा जाता है। इस अवधारणा का नाम स्विस गणितज्ञ जैकब बर्नौली के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने प्रायिकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बर्नौली परीक्षण और द्विपद बंटन के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध उपस्थित है। जब द्विपद बंटन में केवल एक परीक्षण होता है &amp;lt;math&amp;gt;(n=1)&amp;lt;/math&amp;gt;, तो यह बर्नौली परीक्षण  में सरल हो जाता है। जबकि बर्नौली परीक्षण  एकल परीक्षण को प्रतिरूप करता है, द्विपद बंटन &amp;lt;math&amp;gt;n&amp;lt;/math&amp;gt; स्वतंत्र बर्नौली परीक्षणों में सफलताओं की एक विशिष्ट संख्या की प्रायिकता को प्रतिरूप करता है। अपनी सरलता के कारण, बर्नौली परीक्षण अधिक जटिल प्रायिकता परीक्षण  के लिए आधार के रूप में कार्य करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा-बरनौली परीक्षण ==&lt;br /&gt;
प्रायिकता में बर्नौली परीक्षण बिल्कुल दो परिणामों वाले [[यादृच्छिक चर और इसके प्रायिकता बंटन|यादृच्छिक]] प्रयोग हैं। बर्नौली परीक्षण का एक वास्तविक जीवन उदाहरण यह है कि आज बरसात होगी या नहीं। अब, केवल संभावित परिणाम हाँ और नहीं हैं और एक दूसरे से स्वतंत्र हैं। साधारणतः, बर्नौली परीक्षण के परिणाम सफलता और विफलता होते हैं। सफलता की प्रायिकता को '&amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt;' से दर्शाया जाता है जबकि विफलता की प्रायिकता को &amp;lt;math&amp;gt;1-p=q &amp;lt;/math&amp;gt; से दर्शाया जाता है। बेटर्नौली परीक्षणों के कुछ अन्य उदाहरण हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* यदि नवजात शिशु लड़की है या लड़का?&lt;br /&gt;
* अच्छी तरह से फेंटे गए डेक का दसवां पत्ता इक्का है। संभावित परिणाम हाँ और नहीं हैं।&lt;br /&gt;
* सिक्का उछालने की घटना। केवल दो संभावित परिणाम चित और पट  हैं।&lt;br /&gt;
* एक पासा फेंकना जहाँ '1' एक 'सफलता' है, अन्य सभी संख्याओं को 'विफलता' माना जाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बर्नौली परीक्षण की शर्तें ==&lt;br /&gt;
अब जब हम बर्नौली परीक्षण का मतलब जानते हैं, तो आइए इसके लिए आवश्यक शर्तों को समझें। नीचे बर्नौली परीक्षण के लिए शर्तों की सूची दी गई है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* परीक्षण की संख्या सीमित होनी चाहिए।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण स्वतंत्र होना चाहिए।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण के मात्र दो संभावित परिणाम होने चाहिए - सफलता और विफलता।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक परीक्षण में प्रत्येक परिणाम की प्रायिकता समान होनी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ-बर्नौली परीक्षण ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* बर्नौली परीक्षणों के मात्र  दो संभावित परिणाम होते हैं।&lt;br /&gt;
* दो संभावित परिणाम एक दूसरे से स्वतंत्र होते हैं।&lt;br /&gt;
* सफलता की प्रायिकता मात्र  &amp;lt;math&amp;gt;p&amp;lt;/math&amp;gt; है और विफलता की प्रायिकता &amp;lt;math&amp;gt;1-p=q &amp;lt;/math&amp;gt; है।&lt;br /&gt;
* प्रत्येक बर्नौली परीक्षण में प्रत्येक परिणाम की प्रायिकता समान रहती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा-द्विपद बंटन ==&lt;br /&gt;
द्विपद बंटन,  द्विपद यादृच्छिक चर का प्रायिकता बंटन  है। एक यादृच्छिक चर एक वास्तविक-मूल्यवान फलन है जिसका प्रांत एक यादृच्छिक प्रयोग का नमूना स्थान है। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए आइए एक उदाहरण पर विचार करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक निष्पक्ष सिक्के को दो बार उछालें। यह एक द्विपद प्रयोग है। इस प्रयोग के 4 संभावित परिणाम  &amp;lt;math&amp;gt;{HH, HT, TH, TT}&amp;lt;/math&amp;gt;  हैं। एक चित प्राप्त करना सफलता के रूप में मानें। प्रत्येक संभावित परिणाम में सफलताओं की संख्या गिनें। यहाँ &amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt; (चित प्राप्त करना) एक द्विपद प्रयोग के &amp;lt;math&amp;gt;n &amp;lt;/math&amp;gt; दोहराए गए परीक्षणों में सफलता ह