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	<title>Vidyalayawiki - User contributions [en]</title>
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		<title>क्षोभमंडलीय प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-19T14:38:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:Vidyalaya Completed]]&lt;br /&gt;
'''क्षोभमंडलीय प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायुमंडल का सबसे निचला क्षेत्र जो समुद्र तल से '''10 किमी''' ऊपर है, क्षोभमंडल के रूप में जाना जाता है।  सभी जीवित प्राणी इसी वायुमंडलीय क्षेत्र में रहते हैं। जब अवांछित ठोस, तरल और गैसीय घटक क्षोभमंडल क्षेत्र में हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (हवा, पानी, मिट्टी, जंगल, फसलें आदि) को प्रदूषित करते हैं, तो इसे '''क्षोभमंडलीय प्रदूषण''' के रूप में जाना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षोभमंडलीय प्रदूषण का पृथ्वी के जीवमंडल पर एक बड़ा हानिकारक प्रभाव पड़ता है, क्षोभमंडलीय प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग हो रही है, इसका मतलब है कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। क्योंकि यह प्रदूषण पृथ्वी को गर्म कर रहा है, इससे हिमखंडों और ग्लेशियरों का पिघलना जारी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों का विवरण''' ==&lt;br /&gt;
अधिकांश वायुमंडलीय प्रदूषण क्षोभमंडल में घटित होते हैं।  क्षोभमंडल सीधे पृथ्वी की सतह से जुड़ा हुआ है, और पृथ्वी पर सभी सजीव और निर्जीव प्राणी इसी क्षेत्र में रहते हैं।  इस क्षोभमंडलीय प्रदूषण में वायु प्रदूषण, अम्लीय वर्षा, ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, प्रकाश रासायनिक धुंध, जल प्रदूषण, सुपोषण, मृदा प्रदूषण आदि घटित होते हैं। जब क्षोभमंडलीय वायु में सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के प्रदूषक गैसें बढ़ जाते हैं। प्रदूषक ऑक्साइड की बढ़ती सांद्रता ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, अम्लीय वर्षा  का कारण बनती है। समुद्र, नदी, नहर, तालाब और झील जैसे विभिन्न जल निकाय मुख्य रूप से औद्योगिक अनुपचारित कचरे के निर्वहन से प्रदूषित होते हैं।  उर्वरक, साबुन, डिटर्जेंट और घरेलू कचरा छोटे जल निकायों के सुपोषण का मुख्य कारण है। सभी प्रकार के प्रदूषण विभिन्न मानवीय गतिविधियों द्वारा छोड़े गए प्रदूषकों के कारण होते हैं, प्रदूषकों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।   &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''ठोस प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
* '''फ्लाई ऐश,''' यह लकड़ी और किसी चीज के जलने से आती है, धुएं में '''कार्बन''' के कण होते हैं।&lt;br /&gt;
*  '''धूल, रेत,''' यह निर्माण स्थल से और रेगिस्तानी क्षेत्र से तेज़ हवा और तूफ़ान द्वारा आती है। ये सभी स्वस्थ हृदय और श्वसन प्रणाली में समस्या पैदा कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
* इन सभी प्रदूषकों में से प्लास्टिक या पॉलीमेरिक उत्पाद आजकल प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। और वे उचित समाप्ति न होने के कारण कबाड़ के रूप में पर्यावरण में स्थिर होकर प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्चक्रण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''तरल प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* तरल प्रदूषकों में कई '''प्रदूषक कणों के एरोसोल, जहरीले कार्बनिक यौगिक, धुंधला धुआं, नाइट्रोजनयुक्त गैसें''' सम्मिलित हैं।&lt;br /&gt;
* इन प्रदूषकों के कारण नाक में लगातार सूखापन या खुजली, आंखों में जलन होती रहती है। इससे सांस लेने में भी दिक्कत होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''गैसीय प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* गैसीय प्रदूषकों में CO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, NO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; सम्मिलित हैं, जो औद्योगिक क्षेत्र और जीवाश्म ईंधन, जैविक उत्पादों के जलने से आते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ग्लोबल वार्मिंग के लिए '''CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' उत्सर्जन जिम्मेदार है। '''CO''' एक विषैली गैस है। यह हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर '''कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन''' बनाता है, और अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन की डिलीवरी को अवरुद्ध करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''NO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' की उच्च सांद्रता पौधों की पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है और प्रकाश संश्लेषण को धीमा कर देती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' (सल्फर डाइऑक्साइड) मनुष्य में श्वसन रोगों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति का कारण बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों के कारण होने वाली समस्याएं''' ==&lt;br /&gt;
जब प्रदूषक पदार्थ पानी में मिल जाते हैं तो यह उपयोग योग्य पानी को प्रदूषित कर देते हैं । इस तरह के पानी का उपयोग करने के कारण, हमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे त्वचा में संक्रमण, लिवर का ठीक से काम न करना, किडनी में पथरी और कुछ गंभीर बीमारियाँ। जब ये प्रदूषक तत्व हवा में मिलते हैं, तो वातावरण का वायु सूचकांक ख़राब कर देते हैं। इस प्रकार का वातावरण जीवित प्राणियों के लिये उपयुक्त नहीं है। इस तरह के प्रदूषण से सांस या दिल से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब आधुनिक काल में, एक अन्य प्रकार के प्रदूषण रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है। रेडियोधर्मी पदार्थ का प्रयोग सैन्य रक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में और परमाणु रिएक्टरों में किया जाता है। रेडियोधर्मी प्रदूषण रेडियोधर्मी कचरे को भूमि, वायु, पानी आदि में छोड़ने से होता है। ये अपशिष्ट वातावरण में लगातार हानिकारक परमाणु विकिरण उत्सर्जित करते हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:41:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण  उत्पन्न हुई है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम रासायनिक खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है। और इसके कोई अन्य दुष्परिणाम भी नहीं होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42121</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:39:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण  उत्पन्न हुई है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42120"/>
		<updated>2023-10-14T13:36:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण  उत्पन्न हुई है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42119</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:35:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:34:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42117</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:32:23Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42116</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:12:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:02:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  इस युग में, लोग स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे ध्यान में रखना चाहिए।  उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42046"/>
		<updated>2023-10-13T03:24:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मिट्टी लगातार प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि रेगिस्तान में बदल रही है। मिट्टी लगातार पोषण तत्वों को खो रही है, और पानी धारण करने की क्षमता भी खो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो गई हैं।  बहुत से लोग इस प्रकार की समस्या से पीड़ित हैं, और वे अपने मूल स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे प्राकृतिक संसाधन, नदी का नेटवर्क सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए मीठे जल संसाधन के रूप में पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  इस युग में, लोग स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे ध्यान में रखना चाहिए।  उन्हें कोई रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-13T03:23:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
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मृदा प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव.  विभिन्न मानवीय गतिविधियों औ