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	<title>Vidyalayawiki - User contributions [en]</title>
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		<title>क्षोभमंडलीय प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-19T14:38:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:Vidyalaya Completed]]&lt;br /&gt;
'''क्षोभमंडलीय प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायुमंडल का सबसे निचला क्षेत्र जो समुद्र तल से '''10 किमी''' ऊपर है, क्षोभमंडल के रूप में जाना जाता है।  सभी जीवित प्राणी इसी वायुमंडलीय क्षेत्र में रहते हैं। जब अवांछित ठोस, तरल और गैसीय घटक क्षोभमंडल क्षेत्र में हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (हवा, पानी, मिट्टी, जंगल, फसलें आदि) को प्रदूषित करते हैं, तो इसे '''क्षोभमंडलीय प्रदूषण''' के रूप में जाना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षोभमंडलीय प्रदूषण का पृथ्वी के जीवमंडल पर एक बड़ा हानिकारक प्रभाव पड़ता है, क्षोभमंडलीय प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग हो रही है, इसका मतलब है कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। क्योंकि यह प्रदूषण पृथ्वी को गर्म कर रहा है, इससे हिमखंडों और ग्लेशियरों का पिघलना जारी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों का विवरण''' ==&lt;br /&gt;
अधिकांश वायुमंडलीय प्रदूषण क्षोभमंडल में घटित होते हैं।  क्षोभमंडल सीधे पृथ्वी की सतह से जुड़ा हुआ है, और पृथ्वी पर सभी सजीव और निर्जीव प्राणी इसी क्षेत्र में रहते हैं।  इस क्षोभमंडलीय प्रदूषण में वायु प्रदूषण, अम्लीय वर्षा, ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, प्रकाश रासायनिक धुंध, जल प्रदूषण, सुपोषण, मृदा प्रदूषण आदि घटित होते हैं। जब क्षोभमंडलीय वायु में सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के प्रदूषक गैसें बढ़ जाते हैं। प्रदूषक ऑक्साइड की बढ़ती सांद्रता ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, अम्लीय वर्षा  का कारण बनती है। समुद्र, नदी, नहर, तालाब और झील जैसे विभिन्न जल निकाय मुख्य रूप से औद्योगिक अनुपचारित कचरे के निर्वहन से प्रदूषित होते हैं।  उर्वरक, साबुन, डिटर्जेंट और घरेलू कचरा छोटे जल निकायों के सुपोषण का मुख्य कारण है। सभी प्रकार के प्रदूषण विभिन्न मानवीय गतिविधियों द्वारा छोड़े गए प्रदूषकों के कारण होते हैं, प्रदूषकों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।   &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''ठोस प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
* '''फ्लाई ऐश,''' यह लकड़ी और किसी चीज के जलने से आती है, धुएं में '''कार्बन''' के कण होते हैं।&lt;br /&gt;
*  '''धूल, रेत,''' यह निर्माण स्थल से और रेगिस्तानी क्षेत्र से तेज़ हवा और तूफ़ान द्वारा आती है। ये सभी स्वस्थ हृदय और श्वसन प्रणाली में समस्या पैदा कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
* इन सभी प्रदूषकों में से प्लास्टिक या पॉलीमेरिक उत्पाद आजकल प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। और वे उचित समाप्ति न होने के कारण कबाड़ के रूप में पर्यावरण में स्थिर होकर प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्चक्रण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''तरल प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* तरल प्रदूषकों में कई '''प्रदूषक कणों के एरोसोल, जहरीले कार्बनिक यौगिक, धुंधला धुआं, नाइट्रोजनयुक्त गैसें''' सम्मिलित हैं।&lt;br /&gt;
* इन प्रदूषकों के कारण नाक में लगातार सूखापन या खुजली, आंखों में जलन होती रहती है। इससे सांस लेने में भी दिक्कत होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''गैसीय प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* गैसीय प्रदूषकों में CO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, NO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; सम्मिलित हैं, जो औद्योगिक क्षेत्र और जीवाश्म ईंधन, जैविक उत्पादों के जलने से आते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ग्लोबल वार्मिंग के लिए '''CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' उत्सर्जन जिम्मेदार है। '''CO''' एक विषैली गैस है। यह हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर '''कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन''' बनाता है, और अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन की डिलीवरी को अवरुद्ध करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''NO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' की उच्च सांद्रता पौधों की पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है और प्रकाश संश्लेषण को धीमा कर देती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' (सल्फर डाइऑक्साइड) मनुष्य में श्वसन रोगों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति का कारण बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों के कारण होने वाली समस्याएं''' ==&lt;br /&gt;
जब प्रदूषक पदार्थ पानी में मिल जाते हैं तो यह उपयोग योग्य पानी को प्रदूषित कर देते हैं । इस तरह के पानी का उपयोग करने के कारण, हमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे त्वचा में संक्रमण, लिवर का ठीक से काम न करना, किडनी में पथरी और कुछ गंभीर बीमारियाँ। जब ये प्रदूषक तत्व हवा में मिलते हैं, तो वातावरण का वायु सूचकांक ख़राब कर देते हैं। इस प्रकार का वातावरण जीवित प्राणियों के लिये उपयुक्त नहीं है। इस तरह के प्रदूषण से सांस या दिल से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब आधुनिक काल में, एक अन्य प्रकार के प्रदूषण रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है। रेडियोधर्मी पदार्थ का प्रयोग सैन्य रक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में और परमाणु रिएक्टरों में किया जाता है। रेडियोधर्मी प्रदूषण रेडियोधर्मी कचरे को भूमि, वायु, पानी आदि में छोड़ने से होता है। ये अपशिष्ट वातावरण में लगातार हानिकारक परमाणु विकिरण उत्सर्जित करते हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42122</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:41:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण  उत्पन्न हुई है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम रासायनिक खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है। और इसके कोई अन्य दुष्परिणाम भी नहीं होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42121</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:39:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण  उत्पन्न हुई है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42120"/>
		<updated>2023-10-14T13:36:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण  उत्पन्न हुई है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42119</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:35:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:34:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण, और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42117</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:32:23Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़ते औद्योगीकरण और शहरी अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42116</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:12:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''असफल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
* कांच, धातु और पॉलिथीन से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू कचरे को सीधे मिट्टी में फेंक दिया जाता है, जो लंबे समय तक मिट्टी में रहता है और आसानी से विघटित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  आज के युग में, लोग अत्यधिक स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे गंभीरता से अपने संज्ञान में लेना चाहिए। उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है। तभी हमें इस समस्या से निजात मिल सकेगी। आइए हम कुछ उपायों पर अपनी दृष्टि डालते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-14T13:02:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप , एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं यह सब कुछ और नहीं मिट्टी का बांझपन ही है। ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के प्राकृतिक बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के दुष्परिणाम ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि क्षेत्र रेगिस्तान में बदल रहे हैं। मिट्टी अपने अंतर्निहित पोषण तत्वों को खो रही है, और उसकी जल धारण  क्षमता भी समाप्त हो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो रही हैं।  बहुत से लोग मृदा प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या से पीड़ित होकर अपने मूल स्थान से दूसरे अन्य स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे भारत देश में प्राकृतिक जल संसाधन, नदियों का जाल सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  इस युग में, लोग स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे ध्यान में रखना चाहिए।  उन्हें ऐसी रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-13T03:24:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मृदा प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव ==&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मिट्टी लगातार प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि रेगिस्तान में बदल रही है। मिट्टी लगातार पोषण तत्वों को खो रही है, और पानी धारण करने की क्षमता भी खो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो गई हैं।  बहुत से लोग इस प्रकार की समस्या से पीड़ित हैं, और वे अपने मूल स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे प्राकृतिक संसाधन, नदी का नेटवर्क सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए मीठे जल संसाधन के रूप में पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  इस युग में, लोग स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे ध्यान में रखना चाहिए।  उन्हें कोई रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42045</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-13T03:23:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव.  विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मिट्टी लगातार प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि रेगिस्तान में बदल रही है। मिट्टी लगातार पोषण तत्वों को खो रही है, और पानी धारण करने की क्षमता भी खो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो गई हैं।  बहुत से लोग इस प्रकार की समस्या से पीड़ित हैं, और वे अपने मूल स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे प्राकृतिक संसाधन, नदी का नेटवर्क सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए मीठे जल संसाधन के रूप में पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  इस युग में, लोग स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे ध्यान में रखना चाहिए।  उन्हें कोई रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-13T03:23:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<updated>2023-10-13T03:22:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विभिन्न मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण मिट्टी लगातार प्रदूषित हो रही है, उपजाऊ भूमि रेगिस्तान में बदल रही है। मिट्टी लगातार पोषण तत्वों को खो रही है, और पानी धारण करने की क्षमता भी खो रही है।  इस परिवर्तन के कारण अनेक पौधे एवं वनस्पतियाँ विलुप्त हो गई हैं।  बहुत से लोग इस प्रकार की समस्या से पीड़ित हैं, और वे अपने मूल स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन कर रहे हैं।  हमारे प्राकृतिक संसाधन, नदी का नेटवर्क सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए मीठे जल संसाधन के रूप में पर्याप्त हैं।  लेकिन बढ़ता रासायनिक कचरा इसे भी प्रदूषित कर रहा है।  इस युग में, लोग स्वार्थी हो गए हैं, उन्हें पर्यावरण और अन्य कारकों की परवाह नहीं है।  इसलिए विभिन्न देशों की सरकारों को इसे ध्यान में रखना चाहिए।  उन्हें कोई रणनीति बनानी चाहिए ताकि मिट्टी का दोहन रोका जा सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42031</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T12:02:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  उत्तरदाई कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42030</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T12:01:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के लोगों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<updated>2023-10-12T11:59:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, समुदायों और व्यक्तियों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42027</id>
		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य जीवन भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, समुदायों और व्यक्तियों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T11:57:55Z</updated>

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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण के कारण ना सिर्फ हमारा वातावरण बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वन्य जीवन को भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि मानवीय गतिविधियां पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, समुदायों और व्यक्तियों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T11:49:35Z</updated>

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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग अपने रहने वाले क्षेत्र से पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में प्रदूषण के कारण जंगल और वन्यजीवों को प्रभावित करता है।  प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ ख़त्म हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर समस्या बन कर उभर कर सामने आ रहा है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने संकेत दिया है कि गिरावट पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, समुदायों और व्यक्तियों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी फसल को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले सूक्ष्मजीव युक्त कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: addded some more content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण उनके प्राकृतिक आवास में प्रदूषण के कारण जंगल और वन्यजीवों को प्रभावित करता है।  प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ कम हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने संकेत दिया है कि गिरावट पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
मृदा '''प्रदूषण''' एक जटिल समस्या है जिसके लिए सरकारों, संस्थानों, समुदायों और व्यक्तियों को संयुक्त उपाय करने की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* रासायनिक प्रसंस्करण वाली सब्जियों के बजाय स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं और यह तभी हो सकता है जब मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा, ताकि हमें कृषि क्षेत्र में रसायनों का उपयोग न करना पड़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* कृषि खाद प्रयोजनों के लिए जैव खाद का उत्पादन करें।  जैव खाद पशुओं के मूत्र और मल अपशिष्ट, मृत पौधों और पत्तियों और कार्बनिक पदार्थों से बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को        आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी खेती को नष्ट न कर दे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सेल, सेमीकंडक्टर चिप, प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन बैग, कांच के कचरे जैसी सामग्री को सीधे मिट्टी में न फेंके।  धातु, कांच, प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से पुनर्चक्रण करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इस प्रयोजन के लिए अधिकृत स्थानों पर समाप्त हो चुकी दवाओं और औषधियों का निपटान करें।  अस्पताल के संक्रमण वाले माइक्रोबियल कचरे का उचित तरीके से निपटान करें।&lt;br /&gt;
* शहर का उचित अपशिष्ट प्रबंधन करें, शहरी नियोजन और परिवहन योजना और अपशिष्ट जल उपचार में सुधार करें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8B%E0%A4%AD%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%AF_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3&amp;diff=42012</id>
		<title>क्षोभमंडलीय प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T11:16:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:Vidyalaya Completed]]&lt;br /&gt;
'''क्षोभमंडलीय प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायुमंडल का सबसे निचला क्षेत्र जो समुद्र तल से '''10 किमी''' ऊपर है, क्षोभमंडल के रूप में जाना जाता है।  सभी जीवित प्राणी इसी वायुमंडलीय क्षेत्र में रहते हैं। जब अवांछित ठोस, तरल और गैसीय घटक क्षोभमंडल क्षेत्र में हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (हवा, पानी, मिट्टी, जंगल, फसलें आदि) को प्रदूषित करते हैं, तो इसे '''क्षोभमंडलीय प्रदूषण''' के रूप में जाना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षोभमंडलीय प्रदूषण का पृथ्वी के जीवमंडल पर एक बड़ा हानिकारक प्रभाव पड़ता है, क्षोभमंडलीय प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग हो रही है, इसका मतलब है कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। क्योंकि यह प्रदूषण पृथ्वी को गर्म कर रहा है, इससे हिमखंडों और ग्लेशियरों का पिघलना जारी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों का विवरण''' ==&lt;br /&gt;
अधिकांश वायुमंडलीय प्रदूषण क्षोभमंडल में घटित होते हैं।  क्षोभमंडल सीधे पृथ्वी की सतह से जुड़ा हुआ है, और पृथ्वी पर सभी सजीव और निर्जीव प्राणी इसी क्षेत्र में रहते हैं।  इस क्षोभमंडलीय प्रदूषण में वायु प्रदूषण, अम्लीय वर्षा, ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, प्रकाश रासायनिक धुंध, जल प्रदूषण, सुपोषण, मृदा प्रदूषण आदि घटित होते हैं। क्षोभमंडलीय वायु में सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के ऑक्साइड की बढ़ती सांद्रता ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, अम्लीय वर्षा  का कारण बनती है। समुद्र, नदी, नहर, तालाब और झील जैसे विभिन्न जल निकाय मुख्य रूप से औद्योगिक अनुपचारित कचरे के निर्वहन से प्रदूषित होते हैं।  उर्वरक, साबुन, डिटर्जेंट और घरेलू कचरा छोटे जल निकायों के सुपोषण का मुख्य कारण है। सभी प्रकार के प्रदूषण विभिन्न मानवीय गतिविधियों द्वारा छोड़े गए प्रदूषकों के कारण होते हैं, प्रदूषकों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।   &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''ठोस प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
* '''फ्लाई ऐश,''' यह लकड़ी और किसी चीज के जलने से आती है, धुएं में '''कार्बन''' के कण होते हैं।&lt;br /&gt;
*  '''धूल, रेत,''' यह निर्माण स्थल से और रेगिस्तानी क्षेत्र से तेज़ हवा और तूफ़ान द्वारा आती है। ये सभी स्वस्थ हृदय और श्वसन प्रणाली में समस्या पैदा कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
* इन सभी प्रदूषकों में से प्लास्टिक या पॉलीमेरिक उत्पाद आजकल प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। और वे उचित समाप्ति न होने के कारण कबाड़ के रूप में पर्यावरण में स्थिर होकर प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्चक्रण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''तरल प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* तरल प्रदूषकों में कई '''प्रदूषक कणों के एरोसोल, जहरीले कार्बनिक यौगिक, धुंधला धुआं, नाइट्रोजनयुक्त गैसें''' सम्मिलित हैं।&lt;br /&gt;
* इन प्रदूषकों के कारण नाक में लगातार सूखापन या खुजली, आंखों में जलन होती रहती है। इससे सांस लेने में भी दिक्कत होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''गैसीय प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* गैसीय प्रदूषकों में CO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, NO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; सम्मिलित हैं, जो औद्योगिक क्षेत्र और जीवाश्म ईंधन, जैविक उत्पादों के जलने से आते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ग्लोबल वार्मिंग के लिए '''CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' उत्सर्जन जिम्मेदार है। '''CO''' एक विषैली गैस है। यह हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर '''कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन''' बनाता है, और अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन की डिलीवरी को अवरुद्ध करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''NO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' की उच्च सांद्रता पौधों की पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है और प्रकाश संश्लेषण को धीमा कर देती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' (सल्फर डाइऑक्साइड) मनुष्य में श्वसन रोगों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति का कारण बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों के कारण होने वाली समस्याएं''' ==&lt;br /&gt;
जब ये प्रदूषक पानी में मिल जाते हैं तो यह उपयोग योग्य पानी को प्रदूषित कर देते हैं । इस तरह के पानी का उपयोग करने के कारण, हमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे त्वचा में संक्रमण, लिवर का ठीक से काम न करना, किडनी में पथरी और कुछ गंभीर बीमारियाँ। जब ये प्रदूषक तत्व हवा में मिलते हैं, तो वातावरण का वायु सूचकांक ख़राब कर देते हैं। इस प्रकार का वातावरण जीवित प्राणियों के लिये उपयुक्त नहीं है। इस तरह के प्रदूषण से सांस या दिल से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब आधुनिक काल में, एक अन्य प्रकार के प्रदूषण रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है। रेडियोधर्मी पदार्थ का प्रयोग सैन्य रक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में और परमाणु रिएक्टरों में किया जाता है। रेडियोधर्मी प्रदूषण रेडियोधर्मी कचरे को भूमि, वायु, पानी आदि में छोड़ने से होता है। ये अपशिष्ट वातावरण में लगातार हानिकारक परमाणु विकिरण उत्सर्जित करते हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>क्षोभमंडलीय प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T11:14:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:Vidyalaya Completed]]&lt;br /&gt;
'''क्षोभमंडलीय प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायुमंडल का सबसे निचला क्षेत्र जो समुद्र तल से '''10 किमी''' ऊपर है, क्षोभमंडल के रूप में जाना जाता है।  सभी जीवित प्राणी इसी वायुमंडलीय क्षेत्र में रहते हैं। जब अवांछित ठोस, तरल और गैसीय घटक क्षोभमंडल क्षेत्र में हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (हवा, पानी, मिट्टी, जंगल, फसलें आदि) को प्रदूषित करते हैं, तो इसे '''क्षोभमंडलीय प्रदूषण''' के रूप में जाना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षोभमंडलीय प्रदूषण का पृथ्वी के जीवमंडल पर एक बड़ा हानिकारक प्रभाव पड़ता है, क्षोभमंडलीय प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग हो रही है, इसका मतलब है कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। क्योंकि यह प्रदूषण पृथ्वी को गर्म कर रहा है, इससे हिमखंडों और ग्लेशियरों का पिघलना जारी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों का विवरण''' ==&lt;br /&gt;
अधिकांश वायुमंडलीय प्रदूषण क्षोभमंडल में घटित होते हैं।  क्षोभमंडल सीधे पृथ्वी की सतह से जुड़ा हुआ है, और पृथ्वी पर सभी सजीव और निर्जीव प्राणी इसी क्षेत्र में रहते हैं।  इस क्षोभमंडलीय प्रदूषण में वायु प्रदूषण, अम्लीय वर्षा, ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, प्रकाश रासायनिक धुंध, जल प्रदूषण, सुपोषण, मृदा प्रदूषण आदि घटित होते हैं। क्षोभमंडलीय वायु में सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के ऑक्साइड की बढ़ती सांद्रता ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, अम्लीय वर्षा  का कारण बनती है। समुद्र, नदी, नहर, तालाब और झील जैसे विभिन्न जल निकाय मुख्य रूप से औद्योगिक अनुपचारित कचरे के निर्वहन से प्रदूषित होते हैं।  उर्वरक, साबुन, डिटर्जेंट और घरेलू कचरा छोटे जल निकायों के सुपोषण का मुख्य कारण है। सभी प्रकार के प्रदूषण विभिन्न मानवीय गतिविधियों द्वारा छोड़े गए प्रदूषकों के कारण होते हैं, प्रदूषकों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।   &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''ठोस प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
* '''फ्लाई ऐश,''' यह लकड़ी और किसी चीज के जलने से आती है, धुएं में '''कार्बन''' के कण होते हैं।&lt;br /&gt;
*  '''धूल, रेत,''' यह निर्माण स्थल से और रेगिस्तानी क्षेत्र से तेज़ हवा और तूफ़ान द्वारा आती है। ये सभी स्वस्थ हृदय और श्वसन प्रणाली में समस्या पैदा कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''तरल प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* तरल प्रदूषकों में कई '''प्रदूषक कणों के एरोसोल, जहरीले कार्बनिक यौगिक, धुंधला धुआं, नाइट्रोजनयुक्त गैसें''' सम्मिलित हैं।&lt;br /&gt;
* इन प्रदूषकों के कारण नाक में लगातार सूखापन या खुजली, आंखों में जलन होती रहती है। इससे सांस लेने में भी दिक्कत होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''गैसीय प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* गैसीय प्रदूषकों में CO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, NO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; सम्मिलित हैं, जो औद्योगिक क्षेत्र और जीवाश्म ईंधन, जैविक उत्पादों के जलने से आते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ग्लोबल वार्मिंग के लिए '''CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' उत्सर्जन जिम्मेदार है। '''CO''' एक विषैली गैस है। यह हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर '''कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन''' बनाता है, और अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन की डिलीवरी को अवरुद्ध करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''NO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' की उच्च सांद्रता पौधों की पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है और प्रकाश संश्लेषण को धीमा कर देती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' (सल्फर डाइऑक्साइड) मनुष्य में श्वसन रोगों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति का कारण बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों के कारण होने वाली समस्याएं''' ==&lt;br /&gt;
जब ये प्रदूषक पानी में मिल जाते हैं तो यह उपयोग योग्य पानी को प्रदूषित कर देते हैं । इस तरह के पानी का उपयोग करने के कारण, हमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे त्वचा में संक्रमण, लिवर का ठीक से काम न करना, किडनी में पथरी और कुछ गंभीर बीमारियाँ। जब ये प्रदूषक तत्व हवा में मिलते हैं, तो वातावरण का वायु सूचकांक ख़राब कर देते हैं। इस प्रकार का वातावरण जीवित प्राणियों के लिये उपयुक्त नहीं है। इस तरह के प्रदूषण से सांस या दिल से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन सभी प्रदूषकों में से प्लास्टिक या पॉलीमेरिक उत्पाद आजकल प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। और वे उचित समाप्ति न होने के कारण कबाड़ के रूप में पर्यावरण में स्थिर होकर प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्चक्रण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब आधुनिक काल में, एक अन्य प्रकार के प्रदूषण रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है। रेडियोधर्मी पदार्थ का प्रयोग सैन्य रक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में और परमाणु रिएक्टरों में किया जाता है। रेडियोधर्मी प्रदूषण रेडियोधर्मी कचरे को भूमि, वायु, पानी आदि में छोड़ने से होता है। ये अपशिष्ट वातावरण में लगातार हानिकारक परमाणु विकिरण उत्सर्जित करते हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>क्षोभमंडलीय प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T11:12:32Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[Category:Vidyalaya Completed]]&lt;br /&gt;
'''क्षोभमंडलीय प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायुमंडल का सबसे निचला क्षेत्र जो समुद्र तल से '''10 किमी''' ऊपर है, क्षोभमंडल के रूप में जाना जाता है।  सभी जीवित प्राणी इसी वायुमंडलीय क्षेत्र में रहते हैं। जब अवांछित ठोस, तरल और गैसीय घटक क्षोभमंडल क्षेत्र में हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (हवा, पानी, मिट्टी, जंगल, फसलें आदि) को प्रदूषित करते हैं, तो इसे '''क्षोभमंडलीय प्रदूषण''' के रूप में जाना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षोभमंडलीय प्रदूषण का पृथ्वी के जीवमंडल पर एक बड़ा हानिकारक प्रभाव पड़ता है, क्षोभमंडलीय प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग हो रही है, इसका मतलब है कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। क्योंकि यह प्रदूषण पृथ्वी को गर्म कर रहा है, इससे हिमखंडों और ग्लेशियरों का पिघलना जारी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों का विवरण''' ==&lt;br /&gt;
अधिकांश वायुमंडलीय प्रदूषण क्षोभमंडल में घटित होते हैं।  क्षोभमंडल सीधे पृथ्वी की सतह से जुड़ा हुआ है, और पृथ्वी पर सभी सजीव और निर्जीव प्राणी इसी क्षेत्र में रहते हैं।  इस क्षोभमंडलीय प्रदूषण में वायु प्रदूषण, अम्लीय वर्षा, ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, प्रकाश रासायनिक धुंध, जल प्रदूषण, सुपोषण, मृदा प्रदूषण आदि घटित होते हैं। क्षोभमंडलीय वायु में सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के ऑक्साइड की बढ़ती सांद्रता ग्रीन हाउस प्रभाव, धुंध, अम्लीय वर्षा  का कारण बनती है। समुद्र, नदी, नहर, तालाब और झील जैसे विभिन्न जल निकाय मुख्य रूप से औद्योगिक अनुपचारित कचरे के निर्वहन से प्रदूषित होते हैं।  उर्वरक, साबुन, डिटर्जेंट और घरेलू कचरा छोटे जल निकायों के सुपोषण का मुख्य कारण है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''ठोस प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
* '''फ्लाई ऐश,''' यह लकड़ी और किसी चीज के जलने से आती है, धुएं में '''कार्बन''' के कण होते हैं।&lt;br /&gt;
*  '''धूल, रेत,''' यह निर्माण स्थल से और रेगिस्तानी क्षेत्र से तेज़ हवा और तूफ़ान द्वारा आती है। ये सभी स्वस्थ हृदय और श्वसन प्रणाली में समस्या पैदा कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''तरल प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* तरल प्रदूषकों में कई '''प्रदूषक कणों के एरोसोल, जहरीले कार्बनिक यौगिक, धुंधला धुआं, नाइट्रोजनयुक्त गैसें''' सम्मिलित हैं।&lt;br /&gt;
* इन प्रदूषकों के कारण नाक में लगातार सूखापन या खुजली, आंखों में जलन होती रहती है। इससे सांस लेने में भी दिक्कत होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== '''गैसीय प्रदूषक''' ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* गैसीय प्रदूषकों में CO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, NO&amp;lt;sub&amp;gt;x&amp;lt;/sub&amp;gt;, SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; सम्मिलित हैं, जो औद्योगिक क्षेत्र और जीवाश्म ईंधन, जैविक उत्पादों के जलने से आते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ग्लोबल वार्मिंग के लिए '''CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' उत्सर्जन जिम्मेदार है। '''CO''' एक विषैली गैस है। यह हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर '''कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन''' बनाता है, और अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन की डिलीवरी को अवरुद्ध करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''NO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' की उच्च सांद्रता पौधों की पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है और प्रकाश संश्लेषण को धीमा कर देती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''SO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;''' (सल्फर डाइऑक्साइड) मनुष्य में श्वसन रोगों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति का कारण बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''प्रदूषक पदार्थों के कारण होने वाली समस्याएं''' ==&lt;br /&gt;
जब ये प्रदूषक पानी में मिल जाते हैं तो यह उपयोग योग्य पानी को प्रदूषित कर देते हैं । इस तरह के पानी का उपयोग करने के कारण, हमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे त्वचा में संक्रमण, लिवर का ठीक से काम न करना, किडनी में पथरी और कुछ गंभीर बीमारियाँ। जब ये प्रदूषक तत्व हवा में मिलते हैं, तो वातावरण का वायु सूचकांक ख़राब कर देते हैं। इस प्रकार का वातावरण जीवित प्राणियों के लिये उपयुक्त नहीं है। इस तरह के प्रदूषण से सांस या दिल से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T10:37:55Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण उनके प्राकृतिक आवास में प्रदूषण के कारण जंगल और वन्यजीवों को प्रभावित करता है।  प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ कम हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने संकेत दिया है कि गिरावट पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी खेती को नष्ट न कर दे।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T10:35:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण उनके प्राकृतिक आवास में प्रदूषण के कारण जंगल और वन्यजीवों को प्रभावित करता है।  प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ कम हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने संकेत दिया है कि गिरावट पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी खेती को नष्ट न कर दे।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T10:33:49Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण उनके प्राकृतिक आवास में प्रदूषण के कारण जंगल और वन्यजीवों को प्रभावित करता है।  प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ कम हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने संकेत दिया है कि गिरावट पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी खेती को नष्ट न कर दे।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>मृदा प्रदूषण</title>
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		<updated>2023-10-12T10:25:10Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]]&lt;br /&gt;
'''मृदा प्रदूषण'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक युग में, हम देख सकते हैं, कि मिट्टी ने अपनी पोषण गुणवत्ता खो दी है। लगातार रसायनों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी की पोषक क्षमता खत्म हो चुकी है। पृथ्वी की मिट्टी पर जमा होने वाले जहरीले पदार्थ हमारे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा यह भोजन, पानी और वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।  मृदा क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक बहुत से लोग पलायन कर जाएंगे। मृदा प्रदूषण उनके प्राकृतिक आवास में प्रदूषण के कारण जंगल और वन्यजीवों को प्रभावित करता है।  प्रदूषण के कारण लगातार विश्व के अधिकांश जलोढ़ क्षेत्र या आर्द्रभूमियाँ कम हो रही हैं, नदियाँ ख़त्म हो रही हैं।  मृदा प्रदूषण एक वैश्विक खतरा है जो यूरोप, यूरेशिया, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर है।  संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने संकेत दिया है कि गिरावट पहले से ही दुनिया की एक तिहाई मिट्टी को प्रभावित कर रही है।  बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, शहरीकरण और उनके अपशिष्ट कुप्रबंधन के कारण पूरी दुनिया की पोषक मिट्टी मरुस्थलीकरण की ओर जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम खाद और उर्वरक के बिना कोई भी फसल उगाने में सक्षम नहीं हैं, ये रसायन भी मिट्टी की बांझपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वे मिट्टी के बायोम को नष्ट कर देते हैं, जो इसे पुनः पोषण प्राप्त करने में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की जल ग्रहण शक्ति में निरंतर गिरावट ही '''मृदा प्रदूषण''' है, संक्षेप में इसे '''मिट्टी की बांझपन''' या '''मरुस्थलीकरण''' कहा जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मृदा प्रदूषण के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण  के लिए  जिम्मेदार कारक''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारी वर्षा, तेज हवा, भूस्खलन के कारण मृदा अपरदन होता है।  और मिट्टी की ऊपरी परत सबसे उपजाऊ होती है.  इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* एक कृषि भूमि पर एक ही प्रकार की फसल करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का अनुपात भी असंतुलित हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* औद्योगिक अपशिष्ट जल सीधे नदी या नहर में प्रवाहित होता है जिसका उपयोग कृषि भूमि में किया जाता है।  इस गंदे पानी में प्रदूषक यौगिक, भारी धातु के अंश जैसे '''Pb , Hg''' होते हैं।  यह न केवल मिट्टी को बल्कि फसल की वनस्पति को भी प्रदूषित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* अकार्बनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से '''केंचुआ, राइजोबियम''' जैसे फसल के लिए उपयोगी जीव मर जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इससे फसल की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती है।  क्योंकि ये कीटनाशक पौधों की जड़ों द्वारा भी अवशोषित हो जाते हैं और फसल की वनस्पति में मिल जाते हैं।  और जब ये फसल बाहरी क्षेत्र में निर्यात के लिए भेजी जाती है तो '''गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण''' में '''फेल''' हो जाती है।  ये उत्पाद खाने लायक सुरक्षित नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए  उपाय''' ==&lt;br /&gt;
हमें जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए जो मिट्टी के स्वास्थ्य या वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।  जैविक खाद में बायोमास को आसानी से हाइड्रेट किया जा सकता है और पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि हम कीटनाशकों या उर्वरक का उपयोग करते हैं।  वह उचित अनुपात में होना चाहिए, ताकि वह हमारी खेती को नष्ट न कर दे।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=41481</id>
		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-04T13:59:10Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाने का विषय है जिनकी लागत कम होती है और इसके सह-उत्पादों का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।  हरित रसायन एक विज्ञान  है जो अनुप्रयोगात्मक कार्यों में प्रयुक्त रसायनों के पुन: उपयोग या पुनर्चक्रण से संबंधित है।  यदि किसी रसायन का पुनर्चक्रण संभव नहीं है तो निपटान से पहले उसे कम खतरनाक बनाने के लिए उसका उपचार करें।  इसके अलावा यदि किसी रसायन का उपचार संभव नहीं है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुपचारित रसायनों का सुरक्षित रूप से निपटान करना और ऐसा तभी किया जाना चाहिए जब अन्य विकल्प संभव न हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*हम कार्यालयों, होटल, रेस्तरां और घरों में ईंधन हीटर के स्थान पर भोजन बनाने और पानी उबालने के लिए सौर हीटर  का उपयोग कर सकते हैं।  इसकी लागत ईंधन वाले हीटरों से कम है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।  यह भी हरित ऊर्जा अनुप्रयोग का एक उदाहरण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान का लक्ष्य लागत-प्रतिस्पर्धी रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का निर्माण और उत्पादन करना है जो अपने स्रोत पर प्रदूषण को कम करके प्रदूषण-रोकथाम के उच्चतम स्तर को प्राप्त करते हैं।  यह वह प्रक्रिया है जो प्रदूषण के हर चरण पर प्रदूषण को खत्म करने का काम करती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=41480</id>
		<title>हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-04T13:55:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सीधे और  सरल शब्दों में हरित रसायन विज्ञान पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के निर्माण से संबंधित है जिसकी लागत इसके अन्य विकल्पों की तुलना में कम होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विषय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की आवश्यकताओं पर आधारित है, इसका उद्देश्य निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
* इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
* इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। &lt;br /&gt;
* यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये सिद्धांत हरित रसायन  को अच्छे तरीके से व्यक्त करते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन पूरी तरह से एक आधुनिक अवधारणा है जिसका उपयोग हर स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है।  यह प्रारंभिक चरण से लेकर संपूर्ण उपयोग प्रक्रिया तक पर्यावरण को प्रदूषित न करने के लिए काम करना शुरू कर देता है।  कोई भी अन्य औद्योगिक या फैक्ट्री रसायन उत्पाद जो इसके उपयोग के दौरान प्रदूषक छोड़ते हैं या इसके उपयोग के बाद बचे रहते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।  ऐसा पर्यावरण में उनके अपशिष्ट के विघटित न होने के कारण हो सकता है।  हरित रसायन उस प्रकार के रसायनों का स्थान लेता है।  यह उन विनाशकारी रसायनों को प्रकृति में पर्यावरण-अनुकूल पदार्थों से प्रतिस्थापित करता है, जिनका कोई दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है।  और वे आसानी से समाप्त हो सकते हैं। हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा से संबंधित कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी चर्चा नीचे की गई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उपयोग हेतु सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं''': ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उत्पाद संश्लेषण की लागत को कम करें''': संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पर्यावरण से रासायनिक अपशिष्ट को रोकें:''' उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें''': रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें:''' जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं:''' रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें:''' उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं''': रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=41479</id>
		<title>हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-04T13:54:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सीधे और  सरल शब्दों में हरित रसायन पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के निर्माण से संबंधित है जिसकी लागत इसके अन्य विकल्पों की तुलना में कम होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विषय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की आवश्यकताओं पर आधारित है, इसका उद्देश्य निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
* इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
* इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। &lt;br /&gt;
* यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये सिद्धांत हरित रसायन  को अच्छे तरीके से व्यक्त करते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन पूरी तरह से एक आधुनिक अवधारणा है जिसका उपयोग हर स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है।  यह प्रारंभिक चरण से लेकर संपूर्ण उपयोग प्रक्रिया तक पर्यावरण को प्रदूषित न करने के लिए काम करना शुरू कर देता है।  कोई भी अन्य औद्योगिक या फैक्ट्री रसायन उत्पाद जो इसके उपयोग के दौरान प्रदूषक छोड़ते हैं या इसके उपयोग के बाद बचे रहते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।  ऐसा पर्यावरण में उनके अपशिष्ट के विघटित न होने के कारण हो सकता है।  हरित रसायन उस प्रकार के रसायनों का स्थान लेता है।  यह उन विनाशकारी रसायनों को प्रकृति में पर्यावरण-अनुकूल पदार्थों से प्रतिस्थापित करता है, जिनका कोई दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है।  और वे आसानी से समाप्त हो सकते हैं। हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा से संबंधित कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी चर्चा नीचे की गई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उपयोग हेतु सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं''': ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उत्पाद संश्लेषण की लागत को कम करें''': संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पर्यावरण से रासायनिक अपशिष्ट को रोकें:''' उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें''': रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें:''' जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं:''' रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें:''' उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं''': रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<updated>2023-10-04T13:49:55Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विषय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की आवश्यकताओं पर आधारित है, इसका उद्देश्य निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
* इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
* इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। &lt;br /&gt;
* यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये सिद्धांत हरित रसायन  को अच्छे तरीके से व्यक्त करते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन पूरी तरह से एक आधुनिक अवधारणा है जिसका उपयोग हर स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है।  यह प्रारंभिक चरण से लेकर संपूर्ण उपयोग प्रक्रिया तक पर्यावरण को प्रदूषित न करने के लिए काम करना शुरू कर देता है।  कोई भी अन्य औद्योगिक या फैक्ट्री रसायन उत्पाद जो इसके उपयोग के दौरान प्रदूषक छोड़ते हैं या इसके उपयोग के बाद बचे रहते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।  ऐसा पर्यावरण में उनके अपशिष्ट के विघटित न होने के कारण हो सकता है।  हरित रसायन उस प्रकार के रसायनों का स्थान लेता है।  यह उन विनाशकारी रसायनों को प्रकृति में पर्यावरण-अनुकूल पदार्थों से प्रतिस्थापित करता है, जिनका कोई दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है।  और वे आसानी से समाप्त हो सकते हैं। हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा से संबंधित कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी चर्चा नीचे की गई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उपयोग हेतु सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं''': ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उत्पाद संश्लेषण की लागत को कम करें''': संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पर्यावरण से रासायनिक अपशिष्ट को रोकें:''' उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें''': रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें:''' जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं:''' रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें:''' उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं''': रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>हरित रसायन</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विषय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की आवश्यकताओं पर आधारित है, इसका उद्देश्य निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
* इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
* इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। &lt;br /&gt;
* यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये सिद्धांत हरित रसायन  को अच्छे तरीके से व्यक्त करते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन पूरी तरह से एक आधुनिक अवधारणा है जिसका उपयोग हर स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है।  यह प्रारंभिक चरण से लेकर संपूर्ण उपयोग प्रक्रिया तक पर्यावरण को प्रदूषित न करने के लिए काम करना शुरू कर देता है।  कोई भी अन्य औद्योगिक या फैक्ट्री रसायन उत्पाद जो इसके उपयोग के दौरान प्रदूषक छोड़ते हैं या इसके उपयोग के बाद बचे रहते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।  ऐसा पर्यावरण में उनके अपशिष्ट के विघटित न होने के कारण हो सकता है।  हरित रसायन उस प्रकार के रसायनों का स्थान लेता है।  यह उन विनाशकारी रसायनों को प्रकृति में पर्यावरण-अनुकूल पदार्थों से प्रतिस्थापित करता है, जिनका कोई दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है।  और वे आसानी से समाप्त हो सकते हैं। हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा से संबंधित कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी चर्चा नीचे की गई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं''': ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संश्लेषण की लागत को कम करें''': संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पर्यावरण से अपशिष्ट को रोकें:''' उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें''': रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें:''' जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं:''' रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें:''' उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं''': रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विषय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की आवश्यकताओं पर आधारित है, इसका उद्देश्य निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
* इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
* इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। &lt;br /&gt;
* यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये सिद्धांत हरित रसायन  को अच्छे तरीके से प्रकट करते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन पूरी तरह से एक आधुनिक अवधारणा है जिसका उपयोग हर स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है।  यह प्रारंभिक चरण से लेकर संपूर्ण उपयोग प्रक्रिया तक पर्यावरण को प्रदूषित न करने के लिए काम करना शुरू कर देता है।  कोई भी अन्य औद्योगिक या फैक्ट्री रसायन उत्पाद जो इसके उपयोग के दौरान प्रदूषक छोड़ते हैं या इसके उपयोग के बाद बचे रहते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।  ऐसा पर्यावरण में उनके अपशिष्ट के विघटित न होने के कारण हो सकता है।  हरित रसायन उस प्रकार के रसायनों का स्थान लेता है।  यह उन विनाशकारी रसायनों को प्रकृति में पर्यावरण-अनुकूल पदार्थों से प्रतिस्थापित करता है, जिनका कोई दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है।  और वे आसानी से समाप्त हो सकते हैं। हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा से संबंधित कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी चर्चा नीचे की गई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं''': ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संश्लेषण की लागत को कम करें''': संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पर्यावरण से अपशिष्ट को रोकें:''' उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें''': रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें:''' जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं:''' रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें:''' उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं''': रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुणहरित रसायन विषय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की आवश्यकताओं पर आधारित है, इसका उद्देश्य निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
* इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
* इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। &lt;br /&gt;
* यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये सिद्धांत हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा को अच्छे तरीके से प्रकट करते हैं:हरित रसायन से संबंधित कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी चर्चा नीचे की गई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं''': ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संश्लेषण की लागत को कम करें''': संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पर्यावरण से अपशिष्ट को रोकें:''' उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें''': रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें:''' जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं:''' रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें:''' उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं''': रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
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		<updated>2023-10-04T13:33:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुणहरित रसायन विषय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की आवश्यकताओं पर आधारित है, इसका उद्देश्य निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये सिद्धांत हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा को अच्छे तरीके से प्रकट करते हैं:हरित रसायन से संबंधित कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिनकी चर्चा नीचे की गई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं: ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संश्लेषण की लागत को कम करें: संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर्यावरण से अपशिष्ट को रोकें: उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें: रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें: जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं: रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें: उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं: रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैंये सिद्धांत हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा को अच्छे तरीके से प्रकट करते हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं: ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संश्लेषण की लागत को कम करें: संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर्यावरण से अपशिष्ट को रोकें: उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें: रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें: जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं: रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें: उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं: रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=41472</id>
		<title>हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-04T13:27:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रारंभ में रासायनिक आणविक स्तर पर प्रदूषण को रोकता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।  यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैंये सिद्धांत हरित रसायन विज्ञान की अवधारणा को अच्छे तरीके से प्रकट करते हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुरक्षित रसायन और उत्पाद बनाएं: ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाएं जो पूरी तरह से प्रभावी हों लेकिन उनमें बहुत कम या कोई विषाक्तता न हो।  मनुष्यों या पर्यावरण के लिए कम या कोई विषाक्तता वाले पदार्थों का उपयोग करने और उत्पन्न करने के लिए संश्लेषण बनाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संश्लेषण की लागत को कम करें: संश्लेषण ताकि अंतिम उत्पाद में शुरुआती सामग्रियों का अधिकतम अनुपात हो।  प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन और ऊर्जा की बर्बादी शून्य होनी चाहिए।  क्योंकि हरित रसायन पूरी तरह से बचत के बारे में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पर्यावरण से अपशिष्ट को रोकें: उपोत्पाद या प्रतिक्रिया प्रक्रिया में अपशिष्ट को रोकने के लिए रासायनिक संश्लेषण बनाएं।  इसका लक्ष्य अपशिष्ट को उपचार के लिए छोड़ना नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रासायनिक व्युत्पन्न के निर्माण से बचें: रासायनिक व्युत्पन्न प्रक्रिया में अतिरिक्त अभिकर्मकों का उपयोग करते हैं और अधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।  यह प्रतिक्रियाओं के लंबे मार्गों द्वारा प्राप्त किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सुरक्षित विलायक और सुरक्षित सहायक पदार्थ का उपयोग करें: जहरीले विलायक, विनाशकारी पृथक्करण घटक, अन्य सहायक प्रदूषक रसायनों का उपयोग करने से बचें।  यदि आपको इस प्रकार के रसायनों का उपयोग करना ही है, तो इन रसायनों के स्थान पर सुरक्षित रसायनों का उपयोग करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उचित भौतिक स्थिति का उपयोग करके ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं: रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उचित आवश्यक तापमान और दबाव पर होने दें जिसमें प्रतिक्रिया सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।  और प्रतिक्रिया आसानी से संभव हो जाती है।  यह वांछित रासायनिक उत्पादों को अधिक बचत के तरीके से ढूंढने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधिक रासायनिक अभिकर्मकों के बजाय उत्प्रेरक पदार्थों का उपयोग करें: उत्प्रेरक उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके अपशिष्ट को कम करें।  उत्प्रेरक कम मात्रा में प्रभावी होते हैं और एक ही प्रतिक्रिया को कई बार अंजाम दे सकते हैं।  वे रासायनिक अभिकर्मकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जिनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है और केवल एक बार प्रतिक्रिया करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रसायनों और उत्पादों को इस तरह बनाएं कि वे उपयोग के बाद नष्ट हो जाएं: रासायनिक उत्पादों को उपयोग के बाद हानिरहित पदार्थों में बदलने के लिए तैयार करें ताकि वे पर्यावरण में जमा न हों।  और दूसरे जीव को नुकसान न पहुंचाएं.&lt;/div&gt;</summary>
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		<title>हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-04T13:27:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रारंभ में रासायनिक आणविक स्तर पर प्रदूषण को रोकता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।  यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T05:52:09Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रारंभ में रासायनिक आणविक स्तर पर प्रदूषण को रोकता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।  यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;/div&gt;</summary>
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		<updated>2023-10-02T05:49:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रारंभ में रासायनिक आणविक स्तर पर प्रदूषण को रोकता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।  यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T05:00:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान ऐसे रासायनिक उत्पाद बनाने का विषय है जिनकी लागत कम होती है और इसके सह-उत्पादों का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।  हरित रसायन एक अवधारणा है जो अनुप्रयोगात्मक कार्यों में प्रयुक्त रसायनों के पुन: उपयोग या पुनर्चक्रण से संबंधित है।  यदि किसी रसायन का पुनर्चक्रण संभव नहीं है तो निपटान से पहले उसे कम खतरनाक बनाने के लिए उसका उपचार करें।  इसके अलावा यदि किसी रसायन का उपचार संभव नहीं है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुपचारित रसायनों का सुरक्षित रूप से निपटान करना और ऐसा तभी किया जाना चाहिए जब अन्य विकल्प संभव न हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*हम कार्यालयों, होटल, रेस्तरां और घरों में ईंधन हीटर के स्थान पर भोजन बनाने और पानी उबालने के लिए सौर हीटर  का उपयोग कर सकते हैं।  इसकी लागत ईंधन वाले हीटरों से कम है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।  यह भी हरित ऊर्जा अनुप्रयोग का एक उदाहरण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान का लक्ष्य लागत-प्रतिस्पर्धी रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का निर्माण और उत्पादन करना है जो अपने स्रोत पर प्रदूषण को कम करके प्रदूषण-रोकथाम के उच्चतम स्तर को प्राप्त करते हैं।  यह वह प्रक्रिया है जो प्रदूषण के हर चरण पर प्रदूषण को खत्म करने का काम करती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=41248</id>
		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T04:59:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उदाहरण के लिए, हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित ऊर्जा को अक्सर स्वच्छ ऊर्जा कहा जाता है, क्योंकि यह वह ऊर्जा है जिसका उपयोग करने पर बहुत कम या कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*हम कार्यालयों, होटल, रेस्तरां और घरों में ईंधन हीटर के स्थान पर भोजन बनाने और पानी उबालने के लिए सौर हीटर  का उपयोग कर सकते हैं।  इसकी लागत ईंधन वाले हीटरों से कम है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।  यह भी हरित ऊर्जा अनुप्रयोग का एक उदाहरण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान का लक्ष्य लागत-प्रतिस्पर्धी रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का निर्माण और उत्पादन करना है जो अपने स्रोत पर प्रदूषण को कम करके प्रदूषण-रोकथाम के उच्चतम स्तर को प्राप्त करते हैं।  यह वह प्रक्रिया है जो प्रदूषण के हर चरण पर प्रदूषण को खत्म करने का काम करती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T04:34:39Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
हरित रसायन रासायनिक प्रक्रियाओं का तंत्र है जो खतरनाक पदार्थों के उपयोग या उत्पादन को कम या समाप्त करता है।  हरित रसायन विज्ञान प्रदूषण के स्रोत स्तर पर प्रदूषण को कम करता है और इसका लक्ष्य रासायनिक अभिकर्मकों, सॉल्वैंट्स और उत्पादों के खतरों को कम करना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन के गुण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रारंभ में रासायनिक आणविक स्तर पर प्रदूषण को रोकता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन विज्ञान अवधारणा वास्तविक दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए नवीन वैज्ञानिक समाधान लागू करती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण स्रोत में कमी आती है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोत उत्पादन का स्थान लेता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसका अंतिम लक्ष्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।  यह मौजूदा उत्पादों और इसकी आगे की प्रक्रियाओं से आने वाले खतरों को समाप्त करता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम उनके आंतरिक खतरों को कम करने के लिए वैकल्पिक रासायनिक उत्पादों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
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		<title>हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T04:34:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: Added some content&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T04:09:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उदाहरण के लिए, हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित ऊर्जा को अक्सर स्वच्छ ऊर्जा कहा जाता है, क्योंकि यह वह ऊर्जा है जिसका उपयोग करने पर बहुत कम या कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*हम कार्यालयों, होटल, रेस्तरां और घरों में ईंधन हीटर के स्थान पर भोजन बनाने और पानी उबालने के लिए सौर हीटर  का उपयोग कर सकते हैं।  इसकी लागत ईंधन वाले हीटरों से कम है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।  यह भी हरित ऊर्जा अनुप्रयोग का एक उदाहरण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
सभी प्रकार की हरित ऊर्जा और उनके स्रोत नवीकरणीय हैं।  नवीकरणीय ऊर्जा लगातार स्रोतों से आती है, जो स्वाभाविक रूप से नवीनीकृत होते हैं जैसे पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा।  यही कारण है कि नवीकरणीय ऊर्जा को अक्सर स्थायी ऊर्जा भी कहा जाता है।  यह लंबे समय तक चलेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T03:56:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उदाहरण के लिए, हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित ऊर्जा को अक्सर स्वच्छ ऊर्जा कहा जाता है, क्योंकि यह वह ऊर्जा है जिसका उपयोग करने पर बहुत कम या कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*हम कार्यालयों, होटल, रेस्तरां और घरों में ईंधन हीटर के स्थान पर भोजन बनाने और पानी उबालने के लिए सौर हीटर या भू-तापीय हीटिंग का उपयोग कर सकते हैं।  इसकी लागत ईंधन वाले हीटरों से कम है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।  यह भी हरित ऊर्जा अनुप्रयोग का एक उदाहरण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
सभी प्रकार की हरित ऊर्जा और उनके स्रोत नवीकरणीय हैं।  नवीकरणीय ऊर्जा लगातार स्रोतों से आती है, जो स्वाभाविक रूप से नवीनीकृत होते हैं जैसे पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा।  यही कारण है कि नवीकरणीय ऊर्जा को अक्सर स्थायी ऊर्जा भी कहा जाता है।  यह लंबे समय तक चलेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.vidyalayawiki.in/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=41241</id>
		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T03:44:53Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उदाहरण के लिए, हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित ऊर्जा को अक्सर स्वच्छ ऊर्जा कहा जाता है, क्योंकि यह वह ऊर्जा है जिसका उपयोग करने पर बहुत कम या कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
सभी प्रकार की हरित ऊर्जा और उनके स्रोत नवीकरणीय हैं।  नवीकरणीय ऊर्जा लगातार स्रोतों से आती है, जो स्वाभाविक रूप से नवीनीकृत होते हैं जैसे पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा।  यही कारण है कि नवीकरणीय ऊर्जा को अक्सर स्थायी ऊर्जा भी कहा जाता है।  यह लंबे समय तक चलेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T03:41:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उदाहरण के लिए, हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
सभी प्रकार की हरित ऊर्जा और उनके स्रोत नवीकरणीय हैं।  नवीकरणीय ऊर्जा लगातार स्रोतों से आती है, जो स्वाभाविक रूप से नवीनीकृत होते हैं जैसे पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा।  यही कारण है कि नवीकरणीय ऊर्जा को अक्सर स्थायी ऊर्जा भी कहा जाता है।  यह लंबे समय तक चलेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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		<title>दैनिक जीवन में हरित रसायन</title>
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		<updated>2023-10-02T03:33:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Robin singh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उदाहरण के लिए, हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ और उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।क्योंकि उस प्रकार के उर्वरक में अजैविक रसायन होते हैं जो फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।  लेकिन अगर हम बाज़ार के रसायनों के स्थान पर जैविक खाद और जैव कीटनाशकों का उपयोग करें तो वे हमारी फसल और वनस्पति पर बुरा प्रभाव नहीं डालते हैं।&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह हैलोजेनेटेड यौगिक भूमि में अवशोषित होकर भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है। आज के दिनों में इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है। तरल कार्बन डाइऑक्साइड भी टेट्राक्लोरोइथेन की तरह ड्राईक्लीनिंग विलायक के रूप में काम करता है, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ विचार दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Category:पर्यावरण प्रदूषण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:रसायन विज्ञान]][[Category:अकार्बनिक रसायन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरित रसायन प्रणाली एक उत्पादन प्रक्रिया है जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या गिरावट लाएगी।  किसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उपोत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।&lt;br /&gt;
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विकासात्मक गतिविधियों के साथ-साथ रासायनिक खतरों को कम करने के लिए मौजूदा ज्ञान आधार का उपयोग ही '''हरित रसायन''' विज्ञान है, आइए कुछ उदाहरण से इसे हम बेहतर तरीके से समझते हैं।&lt;br /&gt;
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* भारतीय वैज्ञानिकों ने खेती के तरीके, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई तकनीक आदि की खोज की। भारत में 20वीं सदी के अंत से उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करके कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी, पानी और हवा की स्थिति खराब हो गई है।&lt;br /&gt;
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* ड्राई क्लीनिंग के लिए पहले टेट्रा क्लोरोएथीन (Cl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;C=CCl&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt;) का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।  यह यौगिक भूजल को प्रदूषित करता है, जो कि स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियां उत्पन्न करता है।इस यौगिक के स्थान पर तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; का उपयोग उपयुक्त डिटर्जेंट के साथ किया जाता है।&lt;br /&gt;
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         हैलोजेनेटेड विलायक को तरल CO&amp;lt;sub&amp;gt;2&amp;lt;/sub&amp;gt; से बदलने से भूजल को कम नुकसान होगा।&lt;br /&gt;
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* इमली के बीज की गिरी का पाउडर नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल को स्वच्छ बनाने के लिए एक प्रभावी सामग्री के तौर पर पाया गया है।  यह गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और लागत प्रभावी सामग्री है।  इस पाउडर को आमतौर पर कृषि अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
हवा, झरने, सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके हम कोयले और जीवाश्म ईंधन का उपयोग किए बिना बिजली का उत्पादन करते हैं, इसलिए यह प्रदूषण रहित प्रक्रिया है, बिजली संयंत्र द्वारा कोई प्रदूषक जारी नहीं किया जाएगा।  इसलिए इस प्रकार की बिजली पैदा करना बिल्कुल सफल है, यह हरित ऊर्जा है।&lt;br /&gt;
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हमारे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नीचे कुछ विचार दिए गए हैं, जिनके द्वारा हम अपने पर्यावरण के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
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* हम किसी भी चीज़ को ले जाने के लिए एकल उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, और एक बार इसका उपयोग करने के बाद  हम इसे जहां चाहें वहां फेंक देते हैं।  अब यह नष्ट होने योग्य नहीं है, इसलिए यह बिल्कुल भी विघटित नहीं होगा।  तो आख़िरकार इससे छुटकारा पाने के लिए हमारे पास एक ही उपाय है और वह है इसे जला देना।  लेकिन जलाने पर भी इससे कई जहरीली गैसें निकलती हैं। जो वायु को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर हमारे पास केवल एक ही समाधान है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।  इसके बजाय हमें ऐसे पेपर बैग लेने चाहिए जो प्रदूषण मुक्त हों।&lt;br /&gt;
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* आजकल कई हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पाद चलन या फैशन में हैं जिनमें भारी धातु होती है जो त्वचा संबंधी रोग का कारण बनती हैं। और उन्हें भी प्राकृतिक हर्बल उत्पादों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।  प्राकृतिक उत्पाद शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;
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* सड़क पर पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या अधिक हो गई है। जो वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।  वायुमंडलीय प्रदूषण की दृष्टि से विद्युत वाहन का प्रयोग सर्वोत्तम विकल्प है।  पेट्रोलियम जलाने की तुलना में यह ऊर्जा का बेहतर स्रोत है।  और वाहन की बैटरी को सौर ऊर्जा द्वारा चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज किया जा सकता है।  सौर ऊर्जा सूर्य विकिरण द्वारा प्राप्त की जाती है, इसलिए यह प्रदूषण रहित भी है।  इस प्रकार की ऊर्जा को हरित ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।  क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Robin singh</name></author>
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