प्रोटिस्टा जगत: Difference between revisions

From Vidyalayawiki

Listen

mNo edit summary
 
(4 intermediate revisions by 2 users not shown)
Line 1: Line 1:
[[Category:जीव जगत का वर्गीकरण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:जीव विज्ञान]][[Category:वनस्पति विज्ञान]]
[[Category:जीव जगत का वर्गीकरण]][[Category:कक्षा-11]][[Category:जीव विज्ञान]][[Category:वनस्पति विज्ञान]]
[[Category:Vidyalaya Completed]]
सभ्यता की शुरुआत के बाद से ही, जीवित प्राणियों के वर्गीकरण करने के कई प्रयास हुए हैं। अरस्तू, वैज्ञानिक आधार पर वर्गीकरण का  प्रयास करने वाले सबसे पहले व्यक्ति थे। उन्होंने सरल रूपात्मक पात्रों का प्रयोग करके जीवों को पौधों और जंतुओं में विभाजित किया। पौधों को पेड़ों, झाड़ियों और जड़ी-बूटियों में वर्गीकृत किया। जंतुओं को दो समूहों में वर्गीकृत किया गया, वे जिनका रक्त लाल था और जिनका रक्त लाल नहीं था।
सभ्यता की शुरुआत के बाद से ही, जीवित प्राणियों के वर्गीकरण करने के कई प्रयास हुए हैं। अरस्तू, वैज्ञानिक आधार पर वर्गीकरण का  प्रयास करने वाले सबसे पहले व्यक्ति थे। उन्होंने सरल रूपात्मक पात्रों का प्रयोग करके जीवों को पौधों और जंतुओं में विभाजित किया। पौधों को पेड़ों, झाड़ियों और जड़ी-बूटियों में वर्गीकृत किया। जंतुओं को दो समूहों में वर्गीकृत किया गया, वे जिनका रक्त लाल था और जिनका रक्त लाल नहीं था।


Line 7: Line 8:


== परिभाषा ==
== परिभाषा ==
[[File:प्रोटिस्टा का पदानुक्रमित क्रम.jpg|thumb|400x400px|प्रोटिस्टा का पदानुक्रमित क्रम]]प्रोटिस्टा के अंतर्गत सभी एककोशिकीय और सुकेन्द्रकी जीव (सुकेन्द्रकी जीव उन सभी जीवों को कहा जाता है जिनकी कोशिकाओं के अन्दर कला से घिरा एक केन्द्रक हो) रखे जाते है।\
[[File:प्रोटिस्टा का पदानुक्रमित क्रम.jpg|thumb|400x400px|प्रोटिस्टा का पदानुक्रमित क्रम]]प्रोटिस्टा के अंतर्गत सभी एककोशिकीय और सुकेन्द्रकी जीव (सुकेन्द्रकी जीव उन सभी जीवों को कहा जाता है जिनकी कोशिकाओं के अन्दर कला से घिरा एक केन्द्रक हो) रखे जाते है।


परन्तु इस जगत की सीमाएँ अच्छी तरह से परिभाषित नहीं की जा सकतीं हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटिस्टा जगत में स्वपोषी और विषमपोषी दोनों प्रकार के जीव मौजूद होते हैं। इसलिए, जो प्रोटिस्टा एक वैज्ञानिक के लिए पौधा हो सकता है वह दूसरे के लिए एक जानवर हो सकता है।
परन्तु इस जगत की सीमाएँ अच्छी तरह से परिभाषित नहीं की जा सकतीं हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटिस्टा जगत में स्वपोषी और विषमपोषी दोनों प्रकार के जीव उपस्थित होते हैं। इसलिए, जो प्रोटिस्टा एक वैज्ञानिक के लिए पौधा हो सकता है वह दूसरे के लिए एक जानवर हो सकता है।


प्रोटिस्टा के सदस्य मुख्यतः जलीय होते हैं। यह जगत विभिन्न जगत के बीच एक कड़ी बनाता है जैसे पादप जगत, जंतु जगत और कवक जगत। सुकेन्द्रकी जीव होने के कारण, प्रोटीस्टन कोशिका में एक केन्द्रक और अन्य झिल्ली से बंधे अंग अच्छी तरह से परिभाषित होते है। प्रोटिस्ट, अलैंगिक और लैंगिक दोनों ही रूप से प्रजनन करते हैं और कोशिका संलयन के कारण युग्मनज का निर्माण करते हैं।
प्रोटिस्टा के सदस्य मुख्यतः जलीय होते हैं। यह जगत विभिन्न जगत के बीच एक कड़ी बनाता है जैसे पादप जगत, जंतु जगत और कवक जगत। सुकेन्द्रकी जीव होने के कारण, प्रोटीस्टन कोशिका में एक केन्द्रक और अन्य झिल्ली से बंधे अंग अच्छी तरह से परिभाषित होते है। प्रोटिस्ट, अलैंगिक और लैंगिक दोनों ही रूप से प्रजनन करते हैं और कोशिका संलयन के कारण युग्मनज का निर्माण करते हैं।


== वर्गीकरण ==
== वर्गीकरण ==
प्रॉटिस्टा जगत को 5 समूहों में वर्गीकृत किया गया है-
प्रॉटिस्टा जगत को 5 समूहों में वर्गीकृत किया गया है


[[File:Mikrofoto.de-Dinobryon divergens.jpg|thumb|225x225px|क्राइसोफाइट्स]]
[[File:Mikrofoto.de-Dinobryon divergens.jpg|thumb|225x225px|क्राइसोफाइट्स]]
Line 23: Line 24:
* विशिष्ट प्रकाश संश्लेषक रंगद्रव्य से रंगने के कारण इन्हें सुनहरे-भूरे शैवाल के रूप में भी जाना जाता है।
* विशिष्ट प्रकाश संश्लेषक रंगद्रव्य से रंगने के कारण इन्हें सुनहरे-भूरे शैवाल के रूप में भी जाना जाता है।
* यह जीव अलवरण जल के साथ-साथ समुद्री जल में भी पाए जाते हैं।
* यह जीव अलवरण जल के साथ-साथ समुद्री जल में भी पाए जाते हैं।
* जीव सूक्ष्मदर्शी होते हैं और पानी की धारा में निष्क्रिय रूप से तैरते रहते हैं।
* जीव सूक्ष्मदर्शी होते हैं और जल की धारा में निष्क्रिय रूप से तैरते रहते हैं।
* यह जीव ज्यादातर प्रकाश संश्लेषक होते हैं।
* यह जीव ज्यादातर प्रकाश संश्लेषक होते हैं।
* प्रकाश संश्लेषक डायटम में कोशिका दीवारें सिलिका से जड़ी हुई होती हैं।सिलिका कोशिका भित्ति को मजबूती प्रदान करता है और उन्हें अविनाशी बनाता है।
* प्रकाश संश्लेषक डायटम में कोशिका दीवारें सिलिका से जड़ी हुई होती हैं। सिलिका कोशिका भित्ति को मजबूती प्रदान करता है और उन्हें अविनाशी बनाता है।
* डायटम के आवास में बड़ी मात्रा में कोशिका भित्ति जमा होती रहती है। इस संचय को 'डायटोमेसियस पृथ्वी' कहा जाता है।
* डायटम के आवास में बड़ी मात्रा में कोशिका भित्ति जमा होती रहती है। इस संचय को 'डायटोमेसियस पृथ्वी' कहा जाता है।
* डायटोमेसियस पृथ्वी, रेतीली होने के कारण इनका उपयोग पॉलिश करने, तेल और सिरप को छानने में किया जाता है।  
* डायटोमेसियस पृथ्वी, रेतीली होने के कारण इनका उपयोग पॉलिश करने, तेल और सिरप को छानने में किया जाता है।  
Line 34: Line 35:
* डिनोफ्लैगलेट्स एकल-कोशिका वाले, यूकेरियोटिक जीव होते हैं।
* डिनोफ्लैगलेट्स एकल-कोशिका वाले, यूकेरियोटिक जीव होते हैं।
* ये जीव अधिकतर समुद्री और प्रकाश संश्लेषक होते हैं।
* ये जीव अधिकतर समुद्री और प्रकाश संश्लेषक होते हैं।
* ये जीव उनकी कोशिकाओं में मौजूद मुख्य पिगमेंट के आधार पर पीले, हरे, भूरे, नीले या लाल रंग के दिखाई देते हैं।
* ये जीव उनकी कोशिकाओं में उपस्थित मुख्य पिगमेंट के आधार पर पीले, हरे, भूरे, नीले या लाल रंग के दिखाई देते हैं।
* इन जीवों की विशेषता कशाभिका की एक जोड़ी होती है, जो छोटे चाबुक जैसी "पूंछ" होती है, जिनका उपयोग वे गति के लिए करते हैं।
* इन जीवों की विशेषता कशाभिका की एक जोड़ी होती है, जो छोटे चाबुक जैसी "पूंछ" होती है, जिनका उपयोग वे गति के लिए करते हैं।
* ये जीव जीवदीप्ति और लाल ज्वार पैदा करने के लिए जाने जाते हैं।
* ये जीव जीवदीप्ति और लाल ज्वार पैदा करने के लिए जाने जाते हैं।


=== यूग्लेनोइड्स ===
=== यूग्लेनोइड्स ===
1.) इनमें से अधिकांश स्थिर, ताजे जल में पाए जाने वाले जीव हैं।[[File:Euglena sp.jpg|thumb|250x250px|यूग्लेनोइड्स]]2.) इनमें कोशिका भित्ति के स्थान पर पेलिकल नामक प्रोटीन होता है जो जीवों के शरीर को लचीला बनाती है।


* इनमें से अधिकांश स्थिर, ताजे पानी में पाए जाने वाले जीव हैं।
3.) यद्यपि ये जीव, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषक होते हैं परन्तु सूर्य के प्रकाश से वंचित होने पर वे विषमपोषी की तरह व्यवहार करते हैं         जिसमे अन्य छोटे जीवों का शिकार करना सम्मलित है।
* [[File:Euglena sp.jpg|thumb|250x250px|यूग्लेनोइड्स]]इनमें कोशिका भित्ति के स्थान पर पेलिकल नामक प्रोटीन होता है जो जीवों के शरीर को लचीला बनाती है।                   
 
* यद्यपि ये जीव, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषक होते हैं परन्तु सूर्य के प्रकाश से वंचित होने पर वे विषमपोषी की तरह व्यवहार करते हैं जिसमे अन्य छोटे जीवों का शिकार करना सम्मलित है।
4.) यूग्लीनॉइड्स के रंगद्रव्य, पादपों में उपस्थित, क्लोरोफिल a के समान होते हैं।
* यूग्लीनॉइड्स के रंगद्रव्य, पादपों में उपस्थित, क्लोरोफिल a के समान होते हैं।


=== अवपंक फफूंदी ===
=== अवपंक फफूंदी ===
1.) अवपंक फफूंदी को स्लाइम मोल्ड भी कहते हैं।
2.) ये कवक और जंतु दोनों से मेल खाते हैं।[[File:Slime mould plasmodium beginning to knot - geograph.org.uk - 5030293.jpg|thumb|अवपंक फफूंदी]]3.) स्लाइम मोल्ड्स को पहले कवक के अंतर्गत समूहीकृत किया गया था, लेकिन बाद में, उन्हें अन्य छोटे बहुकोशिकीय और एककोशिकीय यूकेरियोटिक जीवों के साथ प्रोटिस्टा जगत में रखा गया।
4.) ये जीव मृतपोषी होते हैं।


* अवपंक फफूंदी को स्लाइम मोल्ड भी कहते हैं।
5.) इन जीवों में क्लोरोफिल नहीं होता है।
* ये कवक और जंतु दोनों से मेल खाते हैं।
* [[File:Slime mould plasmodium beginning to knot - geograph.org.uk - 5030293.jpg|thumb|अवपंक फफूंदी]]स्लाइम मोल्ड्स को पहले कवक के अंतर्गत समूहीकृत किया गया था, लेकिन बाद में, उन्हें अन्य    छोटे बहुकोशिकीय और एककोशिकीय यूकेरियोटिक जीवों के साथ प्रोटिस्टा जगत में रखा गया।       
* ये जीव मृतपोषी होते हैं।
* इन जीवों में क्लोरोफिल नहीं होता है।
* अनुकूल परिस्थितियों में, ये प्लास्मोडियम नामक समुच्चय बनाते हैं जो व्यापक रूप से फैल सकते हैं और बढ़ सकते हैं।
* प्रतिकूल परिस्थितियों में, प्लाज्मोडियम बीजाणु बनाता है।
* इनमें लैंगिक व अलैंगिक दोनों प्रजनन पाया जाता है।


=== प्रोटोजोआ ===
6.) अनुकूल परिस्थितियों में, ये प्लास्मोडियम नामक समुच्चय बनाते हैं जो व्यापक रूप से फैल सकते हैं और बढ़ सकते हैं।
सभी प्रोटोज़ोअन विषमपोषण होते हैं और परजीवी के रूप में रहते हैं। प्रोटोजोआ के चार प्रमुख समूह हैं।


==== अमीबॉइड प्रोटोजोआ ====
7.) प्रतिकूल परिस्थितियों में, प्लाज्मोडियम बीजाणु बनाता है।
ये जीव ताज़े रहते हैं
पानी, समुद्र का पानी या नम मिट्टी। वे चलते हैं और कब्जा कर लेते हैं  अमीबा की तरह स्यूडोपोडिया (नकली पैर) निकालकर अपना शिकार बनाते हैं। समुद्री रूपों की सतह पर सिलिका के गोले होते हैं। उनमें से कुछ जैसे एंटअमीबा
परजीवी हैं.


==== ध्वजांकित प्रोटोजोअन ====
8.) इनमें लैंगिक व अलैंगिक दोनों प्रजनन पाया जाता है।
इस समूह के सदस्य या तो स्वतंत्र रूप से रहने वाले होते हैं
या परजीवी. उनके पास फ्लैगेल्ला है। परजीवी रूप ऐसे रोग उत्पन्न करते हैं
नींद की बीमारी के रूप में. उदाहरण: ट्रिपैनोसोमा।


==== सिलिअटेड प्रोटोजोअन ====
=== प्रोटोजोआ ===
ये जलीय, सक्रिय रूप से घूमने वाले जीव हैं क्योंकि
हजारों सिलिया की उपस्थिति का. इनमें एक गुहा (गुहा) होती है जो खुलती है
कोशिका सतह के बाहर तक. की पंक्तियों का समन्वित संचलन
सिलिया के कारण भोजन से भरा पानी गले में चला जाता है। उदाहरण:
पैरामीशियम (चित्र 2.4डी)।


==== स्पोरोज़ोअन्स ====
* सभी प्रोटोज़ोअन विषमपोषण होते हैं और परजीवी के रूप में रहते हैं।
इसमें विविध जीव शामिल हैं जिनमें संक्रामक रोग होते हैं
* प्रोटोजोआ के चार प्रमुख समूह होते हैं। इनमे अमीबॉइड प्रोटोजोआ, कशाभित प्रोटोजोअन, सिलिअटेड प्रोटोजोअन और स्पोरोज़ोअन्स आते हैं। आइये इन पर विस्तार से चर्चा करे।
उनके जीवन चक्र में बीजाणु जैसी अवस्था। सबसे कुख्यात प्लाज्मोडियम है
[[File:Amoebe.jpg|thumb|'''''अमीबा''''']]
(मलेरिया परजीवी) जो मलेरिया का कारण बनता है, एक ऐसी बीमारी जो चौंका देने वाली होती है
मानव जनसंख्या पर प्रभाव.


== विशेषताएं ==
==== अमीबॉइड प्रोटोजोआ ====
सभी प्रोटिस्टों की प्राथमिक विशेषता यह है कि वे यूकेरियोटिक जीव हैं। इसका मतलब है कि उनके पास एक झिल्ली से घिरा केंद्रक है। किंगडम प्रोटिस्टा की अन्य विशिष्ट विशेषताएं इस प्रकार हैं:


1.ये आमतौर पर जलीय होते हैं, मिट्टी में या नमी वाले क्षेत्रों में मौजूद होते हैं।
* ये जीव अलवरण जल, समुद्री जल या नम मिट्टी में रहते हैं।                                                                               
* वे गति एवं अपने शिकार को पकड़ने के लिए पादाभ या स्यूडोपोडिया (नकली पैर) का उपयोग करते हैं। पादाभ, कोशिका झिल्ली का एक अस्थायी बांह जैसा प्रक्षेपण होता है।
* इन जीवों में से कुछ उनमें से कुछ परजीवी होते हैं, जैसे '''''एंटअमीबा'''''


2.अधिकांश प्रोटिस्ट प्रजातियाँ एककोशिकीय जीव हैं, हालाँकि, केल्प जैसे कुछ बहुकोशिकीय प्रोटिस्ट भी हैं। समुद्री घास की कुछ प्रजातियाँ इतनी बड़ी हो जाती हैं कि उनकी ऊँचाई 100 फीट से भी अधिक हो जाती है। (विशाल केल्प)।
==== कशाभित प्रोटोजोअन ====


3.किसी भी अन्य यूकेरियोट की तरह, इन प्रजातियों की कोशिकाओं में एक केंद्रक और झिल्ली से बंधे अंग होते हैं।
* इस समूह के सदस्य या तो स्वतंत्र रूप से रहने वाले होते हैं या परजीवी होते हैं।
* इन जीवों में कशाभि होता है।
* परजीवी रूप रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे '''''ट्रिपैनोसोमा'''''  से नींद की बीमारी होती है।


4.वे प्रकृति में स्वपोषी या विषमपोषी हो सकते हैं। एक स्वपोषी जीव अपना भोजन स्वयं बना सकता है और जीवित रह सकता है। दूसरी ओर, एक विषमपोषी जीव को जीवित रहने के लिए पौधों या जानवरों जैसे अन्य जीवों से पोषण प्राप्त करना पड़ता है।
==== सिलिअटेड प्रोटोजोअन ====
[[File:Trypanosoma-brucei.jpg|thumb|'''''ट्रिपैनोसोमा''''']]
* ये जलीय, सक्रिय रूप से घूमने वाले जीव होते हैं। हजारों सिलिया की उपस्थिति के कारण ये जीव तेज़ गति कर सकते है।
* इन जीवों में एक गुहा होती है जो कोशिका सतह के बाहर खुलती है।
* सिलिया के समन्वित संचलन के कारण, भोजन गुहा में चला जाता है।
* वे परमाणु द्विरूपता दिखाते हैं जिसका अर्थ है कि दो प्रकार के नाभिक उपस्थित हैं, एक मैक्रोन्यूक्लियस और एक माइक्रोन्यूक्लियस।
* वे संयुग्मन दर्शाते हैं जो लैंगिक प्रजनन का एक अनोखा रूप है।


5.इस वर्ग के सदस्यों में सहजीवन पाया जाता है। उदाहरण के लिए, समुद्री घास (समुद्री शैवाल) एक बहुकोशिकीय प्रोटिस्ट है जो ऊदबिलावों को अपनी मोटी समुद्री घास के बीच शिकारियों से सुरक्षा प्रदान करती है। बदले में, ऊदबिलाव समुद्री अर्चिन खाते हैं जो समुद्री घास पर निर्भर होते हैं।
==== स्पोरोज़ोअन्स ====


6.परजीविता विरोधियों में भी देखी जाती है। ट्रिपैनोसोमा प्रोटोजोआ जैसी प्रजातियाँ मनुष्यों में नींद की बीमारी का कारण बन सकती हैं।
* इसमें विविध जीव सम्मिलित हैं जिनमें अधिकतर संक्रामक रोग करने वाले जीव होते है।
* इन जीवों के जीवन चक्र में बीजाणु जैसी अवस्था होती है।
* '''''प्लाज्मोडियम''''', मलेरिया परजीवी होता है जो मलेरिया का कारण बनता है।


7.प्रोटिस्ट सिलिया और फ्लैगेल्ला के माध्यम से गति प्रदर्शित करते हैं। प्रोटिस्टा साम्राज्य से संबंधित कुछ जीवों में स्यूडोपोडिया होता है जो उन्हें चलने में मदद करता है।
== विशेषताएं ==
प्रोटिस्टा की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-


8.प्रोटिस्टा अलैंगिक तरीकों से प्रजनन करता है। प्रजनन की यौन विधि अत्यंत दुर्लभ है और केवल तनाव के समय ही होती है।
* ये जीव जलीय होते हैं, मिट्टी में या नमी वाले क्षेत्रों में उपस्थित होते हैं।
* ये एककोशिकीय और सुकेन्द्रकी जीव होते हैं। इन जीवों की कोशिकाओं में एक केंद्रक और झिल्ली से बंधे अंग होते हैं।
* इन जीवों में परजीविता भी देखी जाती है। '''''ट्रिपैनोसोमा''''' ,'''''प्लाज्मोडियम'''''  और '''''एंटअमीबा'''''  जैसी प्रजातियाँ मनुष्यों में बीमारी का कारण बनती हैं।
* इन जीवों में कशाभि, सिलिया और पादाभ के माध्यम से गति प्रदर्शित होती है।
* ये जीव अलैंगिक जनन करते है।
* ये जीव स्वपोषी या विषमपोषी होते हैं। विषमपोषी जीव जीवित रहने के लिए पौधों या जानवरों जैसे अन्य जीवों से पोषण प्राप्त करते है। स्वपोषी जीव अपना भोजन स्वयं बनाते है।


== महत्व ==
== महत्व ==
प्रोटिस्टा के निम्नलिखित महत्व हैं-


* [[File:Mikrofoto.de-Dinobryon divergens.jpg|thumb|225x225px|क्राइसोफाइट्स]]प्रोटिस्ट खाद्य श्रृंखला की नींव के रूप में कार्य करते हैं।
* ऑक्सीजन उत्पादन: प्रोटिस्ट, प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से पृथ्वी पर अधिकतम प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
* प्रोटिस्ट सहजीवी हैं - दो प्रजातियों के बीच घनिष्ठ संबंध रखते हैं, जिसमें से एक को लाभ होता है।
* पोषक तत्व पुनर्चक्रण: प्रोटिस्ट, पोषक तत्वों को विघटित और पुनर्चक्रित करते हैं।
* कुछ प्रोटिस्ट ऑक्सीजन का उत्पादन भी करते हैं और उनका उपयोग जैव ईंधन के उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
* खाद्य श्रृंखला: प्रोटिस्ट, खाद्य शृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाते हैं।
* प्रोटिस्ट कई जानवरों के भोजन का प्राथमिक स्रोत हैं।
* चिकित्सा अनुसंधान: प्रोटिस्ट का उपयोग सामान्यतः चिकित्सा अनुसंधान में किया जाता है।
* कुछ दुर्लभ मामलों में, मनुष्यों द्वारा भोजन और अन्य औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए प्रोटिस्ट का उपयोग किया जाता है।
* उद्योग: प्रोटिस्ट का उपयोग उद्योग में उच्च रक्तचाप के इलाज और कोशिकाओं में रासायनिक संकेतों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।
* फाइटोप्लांकटन व्हेल के लिए एकमात्र भोजन स्रोतों में से एक है
* प्लास्टिक: शैवाल के रसायनों का उपयोग कई प्रकार के प्लास्टिक के उत्पादन के लिए किया जाता है।
* समुद्री शैवाल एक शैवाल है, जिसे पौधे जैसा प्रोटिस्ट माना जाता है।
* ज़ोप्लांकटन को झींगा और लार्वा केकड़ों सहित विभिन्न समुद्री जीवों द्वारा खिलाया जाता है।


== उदाहरण ==
== उदाहरण ==


* क्राइसोफाइट्स -  
* क्राइसोफाइट्स - डायटम और स्वर्ण शैवाल


* डाइनोफ्लैगलेट्स -
* डाइनोफ्लैगलेट्स - '''''गोन्याउलाक्स'''''


* यूग्लेनोइड्स - '''''यूग्लीना'''''
* यूग्लेनोइड्स - '''''यूग्लीना'''''


* कीचड़ के सांचे -
* अवपंक फफूंदी - '''''एक्रेसिया'''''


* अमीबॉइड प्रोटोजोआ -
* अमीबॉइड प्रोटोजोआ - '''''अमीबा'''''


* ध्वजांकित प्रोटोजोअन -
* कशाभित प्रोटोजोअन - '''''ट्रिपैनोसोमा'''''


* सिलिअटेड प्रोटोजोअन -
* सिलिअटेड प्रोटोजोअन - '''''पैरामीशियम'''''


* स्पोरोज़ोअन्स -
* स्पोरोज़ोअन्स - '''''प्लाज्मोडियम'''''

Latest revision as of 15:17, 15 November 2023

सभ्यता की शुरुआत के बाद से ही, जीवित प्राणियों के वर्गीकरण करने के कई प्रयास हुए हैं। अरस्तू, वैज्ञानिक आधार पर वर्गीकरण का प्रयास करने वाले सबसे पहले व्यक्ति थे। उन्होंने सरल रूपात्मक पात्रों का प्रयोग करके जीवों को पौधों और जंतुओं में विभाजित किया। पौधों को पेड़ों, झाड़ियों और जड़ी-बूटियों में वर्गीकृत किया। जंतुओं को दो समूहों में वर्गीकृत किया गया, वे जिनका रक्त लाल था और जिनका रक्त लाल नहीं था।

लिनिअस के समय में वर्गीकरण की दो साम्राज्य प्रणाली थी- प्लांटे (पादप जगत) और एनिमेलिया (जंतु जगत) जिसमें क्रमशः पौधे और जानवर थे।

आर.एच. व्हिटेकर ने पांच जगत वर्गीकरण का प्रस्ताव रखा। उनके द्वारा परिभाषित जगत को मोनेरा जगत, प्रोटिस्टा जगत, कवक जगत, पादप जगत और जंतु जगत नाम दिया गया। उनके द्वारा प्रयुक्त वर्गीकरण के मुख्य मानदंडों में कोशिका संरचना, शारीरिक संगठन, पोषण का तरीका, प्रजनन और  फ़ाइलोजेनेटिक संबंध सम्मिलित हैं। आइए हम किंगडम प्रोटिस्टा के बारे में विस्तार से देखें।

परिभाषा

प्रोटिस्टा का पदानुक्रमित क्रम

प्रोटिस्टा के अंतर्गत सभी एककोशिकीय और सुकेन्द्रकी जीव (सुकेन्द्रकी जीव उन सभी जीवों को कहा जाता है जिनकी कोशिकाओं के अन्दर कला से घिरा एक केन्द्रक हो) रखे जाते है।

परन्तु इस जगत की सीमाएँ अच्छी तरह से परिभाषित नहीं की जा सकतीं हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटिस्टा जगत में स्वपोषी और विषमपोषी दोनों प्रकार के जीव उपस्थित होते हैं। इसलिए, जो प्रोटिस्टा एक वैज्ञानिक के लिए पौधा हो सकता है वह दूसरे के लिए एक जानवर हो सकता है।

प्रोटिस्टा के सदस्य मुख्यतः जलीय होते हैं। यह जगत विभिन्न जगत के बीच एक कड़ी बनाता है जैसे पादप जगत, जंतु जगत और कवक जगत। सुकेन्द्रकी जीव होने के कारण, प्रोटीस्टन कोशिका में एक केन्द्रक और अन्य झिल्ली से बंधे अंग अच्छी तरह से परिभाषित होते है। प्रोटिस्ट, अलैंगिक और लैंगिक दोनों ही रूप से प्रजनन करते हैं और कोशिका संलयन के कारण युग्मनज का निर्माण करते हैं।

वर्गीकरण

प्रॉटिस्टा जगत को 5 समूहों में वर्गीकृत किया गया है

क्राइसोफाइट्स

क्राइसोफाइट्स

  • इस समूह में डायटम और स्वर्ण शैवाल (डेस्मिड) होते हैं।
  • विशिष्ट प्रकाश संश्लेषक रंगद्रव्य से रंगने के कारण इन्हें सुनहरे-भूरे शैवाल के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह जीव अलवरण जल के साथ-साथ समुद्री जल में भी पाए जाते हैं।
  • जीव सूक्ष्मदर्शी होते हैं और जल की धारा में निष्क्रिय रूप से तैरते रहते हैं।
  • यह जीव ज्यादातर प्रकाश संश्लेषक होते हैं।
  • प्रकाश संश्लेषक डायटम में कोशिका दीवारें सिलिका से जड़ी हुई होती हैं। सिलिका कोशिका भित्ति को मजबूती प्रदान करता है और उन्हें अविनाशी बनाता है।
  • डायटम के आवास में बड़ी मात्रा में कोशिका भित्ति जमा होती रहती है। इस संचय को 'डायटोमेसियस पृथ्वी' कहा जाता है।
  • डायटोमेसियस पृथ्वी, रेतीली होने के कारण इनका उपयोग पॉलिश करने, तेल और सिरप को छानने में किया जाता है।
डाइनोफ्लैगलेट्स

डाइनोफ्लैगलेट्स

  • डिनोफ्लैगलेट्स एकल-कोशिका वाले, यूकेरियोटिक जीव होते हैं।
  • ये जीव अधिकतर समुद्री और प्रकाश संश्लेषक होते हैं।
  • ये जीव उनकी कोशिकाओं में उपस्थित मुख्य पिगमेंट के आधार पर पीले, हरे, भूरे, नीले या लाल रंग के दिखाई देते हैं।
  • इन जीवों की विशेषता कशाभिका की एक जोड़ी होती है, जो छोटे चाबुक जैसी "पूंछ" होती है, जिनका उपयोग वे गति के लिए करते हैं।
  • ये जीव जीवदीप्ति और लाल ज्वार पैदा करने के लिए जाने जाते हैं।

यूग्लेनोइड्स

1.) इनमें से अधिकांश स्थिर, ताजे जल में पाए जाने वाले जीव हैं।

यूग्लेनोइड्स

2.) इनमें कोशिका भित्ति के स्थान पर पेलिकल नामक प्रोटीन होता है जो जीवों के शरीर को लचीला बनाती है।

3.) यद्यपि ये जीव, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषक होते हैं परन्तु सूर्य के प्रकाश से वंचित होने पर वे विषमपोषी की तरह व्यवहार करते हैं जिसमे अन्य छोटे जीवों का शिकार करना सम्मलित है।

4.) यूग्लीनॉइड्स के रंगद्रव्य, पादपों में उपस्थित, क्लोरोफिल a के समान होते हैं।

अवपंक फफूंदी

1.) अवपंक फफूंदी को स्लाइम मोल्ड भी कहते हैं।

2.) ये कवक और जंतु दोनों से मेल खाते हैं।

अवपंक फफूंदी

3.) स्लाइम मोल्ड्स को पहले कवक के अंतर्गत समूहीकृत किया गया था, लेकिन बाद में, उन्हें अन्य छोटे बहुकोशिकीय और एककोशिकीय यूकेरियोटिक जीवों के साथ प्रोटिस्टा जगत में रखा गया।

4.) ये जीव मृतपोषी होते हैं।

5.) इन जीवों में क्लोरोफिल नहीं होता है।

6.) अनुकूल परिस्थितियों में, ये प्लास्मोडियम नामक समुच्चय बनाते हैं जो व्यापक रूप से फैल सकते हैं और बढ़ सकते हैं।

7.) प्रतिकूल परिस्थितियों में, प्लाज्मोडियम बीजाणु बनाता है।

8.) इनमें लैंगिक व अलैंगिक दोनों प्रजनन पाया जाता है।

प्रोटोजोआ

  • सभी प्रोटोज़ोअन विषमपोषण होते हैं और परजीवी के रूप में रहते हैं।
  • प्रोटोजोआ के चार प्रमुख समूह होते हैं। इनमे अमीबॉइड प्रोटोजोआ, कशाभित प्रोटोजोअन, सिलिअटेड प्रोटोजोअन और स्पोरोज़ोअन्स आते हैं। आइये इन पर विस्तार से चर्चा करे।
अमीबा

अमीबॉइड प्रोटोजोआ

  • ये जीव अलवरण जल, समुद्री जल या नम मिट्टी में रहते हैं।
  • वे गति एवं अपने शिकार को पकड़ने के लिए पादाभ या स्यूडोपोडिया (नकली पैर) का उपयोग करते हैं। पादाभ, कोशिका झिल्ली का एक अस्थायी बांह जैसा प्रक्षेपण होता है।
  • इन जीवों में से कुछ उनमें से कुछ परजीवी होते हैं, जैसे एंटअमीबा

कशाभित प्रोटोजोअन

  • इस समूह के सदस्य या तो स्वतंत्र रूप से रहने वाले होते हैं या परजीवी होते हैं।
  • इन जीवों में कशाभि होता है।
  • परजीवी रूप रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे ट्रिपैनोसोमा से नींद की बीमारी होती है।

सिलिअटेड प्रोटोजोअन

ट्रिपैनोसोमा
  • ये जलीय, सक्रिय रूप से घूमने वाले जीव होते हैं। हजारों सिलिया की उपस्थिति के कारण ये जीव तेज़ गति कर सकते है।
  • इन जीवों में एक गुहा होती है जो कोशिका सतह के बाहर खुलती है।
  • सिलिया के समन्वित संचलन के कारण, भोजन गुहा में चला जाता है।
  • वे परमाणु द्विरूपता दिखाते हैं जिसका अर्थ है कि दो प्रकार के नाभिक उपस्थित हैं, एक मैक्रोन्यूक्लियस और एक माइक्रोन्यूक्लियस।
  • वे संयुग्मन दर्शाते हैं जो लैंगिक प्रजनन का एक अनोखा रूप है।

स्पोरोज़ोअन्स

  • इसमें विविध जीव सम्मिलित हैं जिनमें अधिकतर संक्रामक रोग करने वाले जीव होते है।
  • इन जीवों के जीवन चक्र में बीजाणु जैसी अवस्था होती है।
  • प्लाज्मोडियम, मलेरिया परजीवी होता है जो मलेरिया का कारण बनता है।

विशेषताएं

प्रोटिस्टा की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

  • ये जीव जलीय होते हैं, मिट्टी में या नमी वाले क्षेत्रों में उपस्थित होते हैं।
  • ये एककोशिकीय और सुकेन्द्रकी जीव होते हैं। इन जीवों की कोशिकाओं में एक केंद्रक और झिल्ली से बंधे अंग होते हैं।
  • इन जीवों में परजीविता भी देखी जाती है। ट्रिपैनोसोमा ,प्लाज्मोडियम और एंटअमीबा जैसी प्रजातियाँ मनुष्यों में बीमारी का कारण बनती हैं।
  • इन जीवों में कशाभि, सिलिया और पादाभ के माध्यम से गति प्रदर्शित होती है।
  • ये जीव अलैंगिक जनन करते है।
  • ये जीव स्वपोषी या विषमपोषी होते हैं। विषमपोषी जीव जीवित रहने के लिए पौधों या जानवरों जैसे अन्य जीवों से पोषण प्राप्त करते है। स्वपोषी जीव अपना भोजन स्वयं बनाते है।

महत्व

प्रोटिस्टा के निम्नलिखित महत्व हैं-

  • ऑक्सीजन उत्पादन: प्रोटिस्ट, प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से पृथ्वी पर अधिकतम प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
  • पोषक तत्व पुनर्चक्रण: प्रोटिस्ट, पोषक तत्वों को विघटित और पुनर्चक्रित करते हैं।
  • खाद्य श्रृंखला: प्रोटिस्ट, खाद्य शृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाते हैं।
  • चिकित्सा अनुसंधान: प्रोटिस्ट का उपयोग सामान्यतः चिकित्सा अनुसंधान में किया जाता है।
  • उद्योग: प्रोटिस्ट का उपयोग उद्योग में उच्च रक्तचाप के इलाज और कोशिकाओं में रासायनिक संकेतों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।
  • प्लास्टिक: शैवाल के रसायनों का उपयोग कई प्रकार के प्लास्टिक के उत्पादन के लिए किया जाता है।

उदाहरण

  • क्राइसोफाइट्स - डायटम और स्वर्ण शैवाल
  • डाइनोफ्लैगलेट्स - गोन्याउलाक्स
  • यूग्लेनोइड्स - यूग्लीना
  • अवपंक फफूंदी - एक्रेसिया
  • अमीबॉइड प्रोटोजोआ - अमीबा
  • कशाभित प्रोटोजोअन - ट्रिपैनोसोमा
  • सिलिअटेड प्रोटोजोअन - पैरामीशियम
  • स्पोरोज़ोअन्स - प्लाज्मोडियम