लीलावती में 'समांतर श्रेढ़ी': Difference between revisions

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==भूमिका==
==भूमिका==
एक समांतर श्रेढ़ी या अंकगणितीय अनुक्रम (AP) संख्याओं का एक अनुक्रम है, जैसे कि किसी भी सफल पद से उसके पूर्ववर्ती पद का अंतर पूरे अनुक्रम में स्थिर रहता है। यह निरंतर अंतर उस समांतर श्रेणी का सामान्य अंतर कहलाता है। उदाहरण के लिए,अनुक्रम 5, 7, 9, 11, 13, 15, . . . सामान्य अंतर  '2' के साथ एक समांतर श्रेढ़ी  है।<ref>(समांतर श्रेढ़ी)"[[:en:Arithmetic_progression|Arithmetic Progression]]"</ref>
एक '''समांतर श्रेढ़ी''' या '''अंकगणितीय अनुक्रम''' (AP) संख्याओं का एक अनुक्रम है, जैसे कि किसी भी सफल पद से उसके पूर्ववर्ती पद का अंतर पूरे अनुक्रम में स्थिर रहता है। यह निरंतर अंतर उस समांतर श्रेणी का सामान्य अंतर कहलाता है। उदाहरण के लिए,अनुक्रम 5, 7, 9, 11, 13, 15, . . . सामान्य अंतर  '2' के साथ एक समांतर श्रेढ़ी  है।<ref>(समांतर श्रेढ़ी)"[[:en:Arithmetic_progression|Arithmetic Progression]]"</ref>
==श्लोक सं॰ 123==
==श्लोक सं॰ 123==
''सैकपदघ्नपदार्धमथैकाद्यङ्कयुतिः किल सङ्कलिताख्या'' ।
''सैकपदघ्नपदार्धमथैकाद्यङ्कयुतिः किल सङ्कलिताख्या'' ।

Revision as of 19:37, 12 July 2023

भूमिका

एक समांतर श्रेढ़ी या अंकगणितीय अनुक्रम (AP) संख्याओं का एक अनुक्रम है, जैसे कि किसी भी सफल पद से उसके पूर्ववर्ती पद का अंतर पूरे अनुक्रम में स्थिर रहता है। यह निरंतर अंतर उस समांतर श्रेणी का सामान्य अंतर कहलाता है। उदाहरण के लिए,अनुक्रम 5, 7, 9, 11, 13, 15, . . . सामान्य अंतर '2' के साथ एक समांतर श्रेढ़ी है।[1]

श्लोक सं॰ 123

सैकपदघ्नपदार्धमथैकाद्यङ्कयुतिः किल सङ्कलिताख्या ।

सा द्वियुतेन पदेन विनिघ्नी स्यात् त्रिहृता खलु सङ्कलितैक्यम् ॥ १२३ ॥

[2]

उदाहरण:

एकादीनां नवान्तानां पृथक् सङ्कलितानि मे ।

तेषां सङ्कलितैक्यानि प्रचक्ष्व गणक द्रुतम् ॥

और ज्ञात कीजिए

श्लोक 123 के अनुसार उत्तर इस प्रकार हैं

श्लोक सं॰ 125

द्विघ्नपदं कुयुतं त्रिविभक्तं सङ्कलितेन हतं कृतियोगः ।

सङ्कलितस्य कृतेः सममेकाद्यङ्कघनैक्यमुदाहृतमाद्यैः॥

समांतर श्रेढ़ी

व्येकपदघ्नचयो मुखयुक स्यादन्त्यधनम् मुखयुग्दलितं तम् ।

मध्यधनं पदसंगुणितं तत्सर्वधनं गणितं च तदुक्तम् ॥

यदि पहला पद a है और सार्व अंतर (Common Difference-C.D.) d है,

समांतर श्रेढ़ी (A.P.) का nवाँ पद इस प्रकार दिया जाता है

n पदों का योग